पलवल | पाकिस्तान को खुफिया जानकारी देने के आरोप में यू-ट्यूबर वसीम अकरम और तौफीक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच में कई अहम खुलासे सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला कि दोनों आरोपी पाकिस्तान का वीजा लगवाने के नाम पर लोगों से पैसे वसूलते थे।
सूत्रों के मुताबिक, वसूले गए पैसों का एक हिस्सा पाकिस्तान दूतावास में तैनात अधिकारी दानिश को दिया जाता था। दानिश इस राशि का इस्तेमाल पाकिस्तान से भारत आने वाले आईएसआई एजेंटों को आर्थिक मदद प्रदान करने में करता था, ताकि उनका नेटवर्क भारत में मजबूती से फैल सके।
क्राइम ब्रांच पलवल की जांच में यह भी सामने आया कि वसीम अकरम, जो यूट्यूबर भी है, कई सालों से सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। वहीं, तौफीक, जो आली मेव का निवासी है, भी लंबे समय से इस नेटवर्क का हिस्सा रहा। दोनों आरोपी पहले ही पाकिस्तान जा चुके हैं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क केवल पैसों की वसूली और जासूसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारत में आईएसआई एजेंटों की पैठ को मजबूत किया जा रहा था। पुलिस और जांच एजेंसियों के राडार पर अभी भी कई संदिग्ध लोग हैं, जिनसे आने वाले दिनों में पूछताछ और गिरफ्तारी हो सकती है।
पिछले घटनाक्रम के अनुसार, तौफीक को पांच दिन की रिमांड के बाद जेल भेजा गया, जबकि वसीम अकरम को अदालत में पेश कर दो दिन की रिमांड पर लिया गया, जिसकी अवधि जल्द पूरी होने वाली है। इस मामले की जानकारी पलवल सीआईए इंचार्ज दीपक गुलिया ने साझा की।