चंडीगढ़ | हाईकोर्ट ने कथित संत रामपाल के खिलाफ लंबित आपराधिक अवमानना याचिका का निपटारा कर दिया है। जस्टिस एचएस सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने रामपाल द्वारा दायर हलफनामे को देखते हुए यह फैसला सुनाया, जिसमें उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी थी।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रामपाल की उम्र (75 वर्ष) और 2014 से लगातार कारावास को ध्यान में रखते हुए यह मामला समाप्त किया जा रहा है। हालांकि, खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि रामपाल या उनके अनुयायी भविष्य में किसी भी प्रकार का ऐसा कार्य करते हैं जिसे अदालत की अवमानना माना जा सके, तो उस पर गंभीर कार्रवाई की जाएगी।
रामपाल ने अपने वकील अर्जुन श्योराण के माध्यम से हलफनामे में कहा कि वह और उनके साथी अपने दोष स्वीकार करने को तैयार हैं। उन्होंने घटना पर गहरा पछतावा जताया और भविष्य में किसी भी परिस्थिति में ऐसी गलती दोहराने से इंकार किया। साथ ही, उन्होंने अदालत और उसके आदेशों की गरिमा का सम्मान करने का आश्वासन दिया।
ज्ञात हो कि 2014 में न्यायपालिका के खिलाफ रामपाल और उनके अनुयायियों के रवैये पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी। उस समय रामपाल की गिरफ्तारी के दौरान महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में भक्त आश्रम में इकट्ठा हुए, जिससे हिंसक स्थिति उत्पन्न हुई।
संबंधित एफआईआर में बताया गया है कि आश्रम की छत पर 1500-2000 युवा लाठी, बम और बंदूकें लेकर तैनात थे, वहीं मुख्य द्वार के बाहर 600-700 महिलाएं और बच्चे बैठे थे। पुलिस द्वारा गिरफ्तारी वारंट की घोषणा पर सहयोगियों ने आश्रम के बाहर डीजल और पेट्रोल के केन रखकर पुलिस को रोकने की कोशिश की।
इसके पहले ट्रायल कोर्ट ने रामपाल को दो अलग-अलग मामलों में हत्या का दोषी ठहराया था, जिनमें हाईकोर्ट ने हाल ही में जमानत दी थी। हालांकि, राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामले में वह अभी भी जेल में बंद हैं।