5 November, 2025
साल 2025 में उत्पन्ना एकादशी का व्रत 15 नवंबर (शनिवार) को रखा जाएगा। श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से उपवास और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करेंगे। व्रत का पारण 16 नवंबर को दोपहर 12:55 बजे से 3:08 बजे के बीच किया जाएगा।
उत्पन्ना एकादशी का महत्व और फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को हजारों यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है तथा भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार, जब असुर मुर ने देवताओं को सताना शुरू किया, तब भगवान विष्णु के शरीर से एक तेजस्वी देवी उत्पन्न हुईं, जिन्होंने उस राक्षस का वध किया। चूंकि देवी एकादशी तिथि पर अवतरित हुईं, इसलिए उन्हें “उत्पन्ना एकादशी” कहा गया।
व्रत के दौरान क्या खा सकते हैं
उत्पन्ना एकादशी के व्रत में साधक दूध, दही, फल, शकरकंद, साबुदाना, आलू, राजगीरा आटा, बादाम, नारियल, सेंधा नमक आदि का सेवन कर सकते हैं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- तुलसी को जल अर्पित करना भी वर्जित माना गया है।
इन नियमों का पालन न करने से व्रत का पुण्य कम हो सकता है। श्रद्धा, संयम और नियमपूर्वक व्रत करने से ही इसका सच्चा फल प्राप्त होता है।