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आध्यात्मिक व राजनीतिक मुद्दों पर मुखर दिखे सीएम सुक्खू, श्री श्री रविशंकर से की विशेष मुलाकात

Palampur, Rahul-:कांगड़ा जिला के गोपालपुर निवासी संवाददाता राहुल चावला की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का हालिया पालमपुर दौरा कई दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। एक दिवसीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आध्यात्मिक, राजनीतिक और प्रशासनिक विषयों पर विस्तार से अपने विचार रखे और कई अहम मुद्दों पर सरकार की नीति स्पष्ट की।

सबसे पहले मुख्यमंत्री सुक्खू ने पालमपुर में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से मुलाकात की। इस भेंट को बेहद सौहार्दपूर्ण और प्रेरणादायक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री श्री रविशंकर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने समाज में मानसिक शांति, आध्यात्मिकता और सेवा भाव को बढ़ाने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने पालमपुर में उनके द्वारा निर्मित कैलाश आश्रम का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि यह आश्रम न केवल हिमाचल के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और सुदृढ़ करेगा।उन्होंने कहा कि कैलाश आश्रम आने वाले समय में देश-विदेश के आध्यात्मिक यात्रियों के लिए एक प्रमुख केंद्र बनेगा, जिससे क्षेत्र में पर्यटन और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि आश्रम के विकास या संचालन से संबंधित भविष्य में कोई चुनौती सामने आती है, तो प्रदेश सरकार हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। इस मुलाकात के दौरान पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार आशीष बुटेल सहित कई अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने श्री श्री रविशंकर द्वारा समाज में किए जा रहे कार्यों की खुलकर प्रशंसा की और कहा कि ऐसे प्रयासों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। स्थानीय लोगों में भी इस मुलाकात को लेकर काफी उत्साह देखा गया। ग्रामीणों और स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इससे क्षेत्र की पहचान और भी मजबूत हुई है।

पंचायत चुनावों पर सुक्खू का स्पष्ट रुख: “आपदा के बीच वोटर राइट्स छीनना ठीक नहीं”

मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर अत्यंत स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश इस समय प्राकृतिक आपदा के दुष्प्रभावों से उबर रहा है। सड़कें, रास्ते और बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हैं। ऐसे में चुनाव कराना या वोटरों के अधिकारों को सीमित करना किसी भी स्थिति में न्यायसंगत नहीं होगा।मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने डिज़ास्टर एक्ट को लागू करते हुए पहले सभी पंचायतों की सड़क और मार्ग सुविधा को बहाल करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही हर पंचायत में बुनियादी सड़कें दुरुस्त हो जाएंगी, चुनाव समय पर अवश्य होंगे।चुनाव आयोग द्वारा जारी तारीखों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कानून के दायरे में रहते हुए मार्ग तलाश रही है। कानूनी सलाह और विस्तृत अध्ययन के बाद जो भी उचित विकल्प मिलेगा, सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ेगी।उन्होंने बताया कि कैबिनेट की बैठक में नई पंचायतों के पुनर्सीमांकन और पुनर्गठन करने का निर्णय भी लिया गया है, जिस पर समानांतर रूप से काम किया जा रहा है।

धर्मशाला में शीतकालीन सत्र को लेकर लिया ऐतिहासिक निर्णय

मुख्यमंत्री सुक्खू ने धर्मशाला में आयोजित होने वाले शीतकालीन सत्र का मामला भी विस्तार से समझाया। उनका कहना था कि पहली बार इतना लंबा शीतकालीन सत्र धर्मशाला में आयोजित किया जा रहा है और यह निर्णय पूरी तरह से स्थानीय लोगों और होटल कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।उन्होंने कहा कि सामान्यतः शीतकालीन सत्र दिसंबर-जनवरी में होता था, जब पर्यटन मौसम अपनी चरम स्थिति पर होता था। सत्र की वजह से होटल बुकिंग रद्द करनी पड़ती थीं, GST में नुकसान होता था और स्थानीय कारोबार प्रभावित होते थे।

इस बार सरकार ने निर्णय लिया है कि सत्र नवंबर के अंत में होगा, ताकि पर्यटन कारोबार को बढ़ावा मिले। मुख्यमंत्री के अनुसार, लगातार 13 दिनों तक विधायक, अधिकारी और मीडिया का धर्मशाला में रहना स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा और कांगड़ा जिला को इससे कई स्तरों पर लाभ मिलेगा।

पंजाब के साथ लंबित अधिकारों और संसाधनों पर हिमाचल का हक

पालमपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने पंजाब री-ऑर्गनाइजेशन एक्ट 1966 के तहत हिमाचल के लंबित अधिकारों का मुद्दा विस्तार से उठाया। उन्होंने कहा कि जब हिमाचल को राज्य का दर्जा दिया गया था, तो जनसंख्या के अनुपात में संपत्तियां भी मिलनी थीं।

मुख्यमंत्री का कहना था कि चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश का 7.19 प्रतिशत हिस्सा बनता है, जिसे अब तक नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट भी इस दावे को सही ठहराता है। इसलिए हिमाचल कोई नई मांग नहीं कर रहा, बल्कि अपना वैधानिक हक मांग रहा है।उन्होंने बताया कि हिमाचल के लोग चार पीढ़ियों से बांध विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें पट्टे तक नहीं मिले। बीबीएमबी में भी हिमाचल को स्थायी सदस्यता नहीं दी गई, जबकि पंजाब और हरियाणा सदस्य हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शानन पावर प्रोजेक्ट की लीज समाप्त हो चुकी है और नियमों के अनुसार प्रोजेक्ट उस प्रदेश का हो जाना चाहिए जिसकी भूमि पर वह स्थित है। सरकार चाहती थी कि यह कार्य आपसी सहमति से हो, लेकिन अब परिस्थितियों के चलते कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है।उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में बने नियम के अनुसार हिमाचल को पावर प्रोजेक्ट्स से 12% फ्री रॉयल्टी मिलनी चाहिए और 1% लाडा भी देना चाहिए, क्योंकि कच्चा संसाधन—पानी—हिमाचल का है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं तो नुकसान हिमाचल के लोग झेलते हैं। इसलिए जो प्रोजेक्ट कर्ज मुक्त हो चुके हैं या 40 साल की मियाद पूरी कर चुके हैं, उनकी 50% फ्री रॉयल्टी भी हिमाचल को मिलनी चाहिए।”उन्होंने पंजाब को “बड़ा भाई” बताते हुए कहा कि भाईचारे के नाते पंजाब को हिमाचल के जायज अधिकार लौटाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल ने हमेशा शांति, सहयोग और कानून का मार्ग अपनाया है, लेकिन अब समय आ गया है कि पंजाब सरकार भी इस विषय को संवेदनशीलता के साथ समझे और समाधान निकाले।

Chandrika

chandrika@summerexpress.in

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