Chintpurni,Vikas-:चिंतपूर्णी में आयोजित महोत्सव को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर विधायक सुदर्शन सिंह बबलू ने पूर्व विधायक बलबीर चौधरी के आरोपों का करारा जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि महोत्सव की तैयारी और आयोजन के लिए पिछली बार भी मंदिर न्यास चिंतपूर्णी से कोई धनराशि नहीं ली गई थी और इस वर्ष भी मंदिर न्यास से एक रु. तक का उपयोग नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बिना तथ्य जाने महोत्सव को विवादित बनाने की कोशिश की जा रही है।
विधायक बबलू ने कहा कि पिछले वर्ष भी कुछ लोगों ने महोत्सव का विरोध किया था, और इस बार विरोध का सिर्फ तरीका बदल गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों पर मेले और महोत्सव आयोजित होते हैं, तो चिंतपूर्णी को लेकर ही आपत्तियाँ क्यों खड़ी की जा रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मंडी में शिवरात्रि मेला भगवान भोले शंकर के नाम से, रेणुका जी में मेला माता रेणुका के नाम से, और सोलन में शूलिनी माता के नाम से मनाया जाता है, जो कि सदियों पुरानी परंपरा है। ऐसे में माता चिंतपूर्णी महोत्सव को लेकर अनावश्यक रूप से शंका पैदा करना उचित नहीं है।
बबलू ने बताया कि माता चिंतपूर्णी के प्रति उनकी आस्था गहरी है। उन्होंने स्वयं नंगे पांव माता की ज्योति लेकर पंडाल में स्थापित की, जो उनकी भक्ति और समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि महोत्सव धार्मिक भावनाओं से जुड़ा आयोजन है, जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को एक मंच देना है।विधायक ने यह भी याद दिलाया कि पिछली बार महोत्सव में हिमाचली कलाकारों को न बुलाए जाने पर भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस बार महोत्सव में विशेष रूप से एक दिन हिमाचली कलाकारों के नाम रखा गया, जिसमें 100 से ज्यादा स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी और दर्शकों ने इसका भरपूर आनंद लिया।बबलू ने आरोप लगाने वालों से आग्रह किया कि वे राजनीति से ऊपर उठकर धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समझें और ऐसे महोत्सवों को विवादों में घसीटने के बजाय सहयोग करें, ताकि स्थानीय संस्कृति को और मजबूती मिले।