Hamirpur, Arvind-:जिला में सरकारी स्कूलों को बेहतर शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराने और गुणवत्ता सुधार के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने क्लस्टर स्कूल प्रणाली लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत प्राइमरी, मिडिल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को एक क्लस्टर में जोड़ा जाएगा, ताकि छात्र आपस में जुड़े संस्थानों का भ्रमण कर आधुनिक शिक्षण तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें।
क्लस्टर मॉडल के अनुसार, प्रत्येक समूह का नेतृत्व एक क्लस्टर हैड करेगा जो अपने अधीन आने वाले स्कूलों की आवश्यकताओं, कमियों और संसाधनों की उपलब्धता पर विशेष नज़र रखेगा। यदि किसी स्कूल में अध्यापक का पद रिक्त है या किसी प्रकार के साधन की कमी है, तो उसकी जानकारी समय पर विभाग तक पहुंचाई जाएगी और कमी को शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।इस व्यवस्था से मिडिल स्कूल के छात्र हाई तथा सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में जाकर आई–लैब, डिजिटल लैब और अन्य आधुनिक सुविधाओं के बारे में सीख सकेंगे। इससे विद्यार्थियों में तकनीकी जागरूकता बढ़ेगी और सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।शिक्षा विभाग के अनुसार, सरकारी स्कूलों में पहले से ही साईंस ऑलंपियाड, खेल प्रतियोगिताएं और विभिन्न सहशैक्षणिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, ताकि छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। अब क्लस्टर स्कूल व्यवस्था जुड़ जाने से शिक्षा प्रणाली और अधिक व्यवस्थित तथा सक्षम बनने की उम्मीद है।
प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कमल किशोर भारती ने बताया कि क्लस्टर स्कूल प्रणाली लागू करने की योजना अंतिम चरण में है। क्लस्टर हैड न केवल स्कूलों की आवश्यकताओं की रिपोर्ट विभाग तक पहुंचाएंगे, बल्कि शिक्षा का सकारात्मक और प्रेरणादायी माहौल बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम शिक्षा क्षेत्र में गुणात्मक सुधार की दिशा में एक सार्थक और व्यावहारिक पहल साबित होगा।