जींद। हरियाणा की पूर्व ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अनुपमा यादव ने अजय चौटाला और अभय चौटाला के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। अनुपमा यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि वह चौटाला परिवार के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मुकदमा दायर करने जा रही हैं और इसके लिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से फंड जुटाने की अपील भी की है।
कौन हैं अनुपमा यादव और क्यों उठा मामला?
अनुपमा यादव हरियाणा के नारनौल की रहने वाली हैं। उनके पति, 1988 बैच के सेवानिवृत्त IPS अधिकारी रामसिंह यादव, पिछले कई वर्षों से चौटाला परिवार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। विवाद उस समय का है जब प्रदेश में इनेलो की सरकार थी।
रिटायर्ड IPS अधिकारी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दावा किया कि 22 साल पहले उन्हें पुलिस हिरासत में 39 जूतों से पीटा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जींद के सफीदो थाने में 17 दिसंबर 2003 को उन्हें गिरफ्तार कर चौटाला पुलिस चौकी ले जाया गया, जहां उस समय अभय सिंह चौटाला खुद थानेदार की कुर्सी पर बैठे थे और उन्हीं ने 39 जूते मारे।
रामसिंह यादव के अनुसार, यह पूरा मामला उस गिरफ्तारी से जुड़ा है जिसमें उन्होंने भजनलाल सरकार के दौरान अजय चौटाला को राजस्थान से रेल की पटरी उखाड़ने के मामले में पकड़ा था। इनेलो सरकार आने के बाद उन पर सरकारी वाहन के दुरुपयोग का केस दर्ज कर लिया गया था।
अभय चौटाला की प्रतिक्रिया
IPS अधिकारी के आरोपों के बाद इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे इस “झूठे आरोप” पर पूर्व IPS अधिकारी के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर करेंगे।
इसके जवाब में रिटायर्ड IPS अधिकारी ने कहा कि वे अदालत में अपना पक्ष साबित करेंगे। “अगर मैं गलत साबित हुआ तो मैं 100 करोड़ दूंगा, अगर मैं सही हुआ तो अभय चौटाला को देने होंगे।”
मीडिया रिपोर्टिंग पर भी सवाल
अनुपमा यादव और उनके पति ने आरोप लगाया कि कई समाचार पत्रों ने पूरी घटना बताते हुए भी अभय चौटाला का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिखा, क्योंकि “डर और दबाव” में खबर गोलमोल तरीके से प्रकाशित की गई।
अब क्या होंगे अगले कदम?
पूर्व जज अनुपमा यादव ने घोषणा की है कि वह जल्द ही अदालत का रुख करेंगी और चौटाला भाइयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगी। उन्होंने समर्थकों से कहा है कि वह केस फाइट करने के लिए आर्थिक सहायता जुटा रही हैं और जीतने पर पैसा वापस लौटा देंगी।
हरियाणा की राजनीति में यह विवाद एक बार फिर सियासी हलचल पैदा कर रहा है और आने वाले दिनों में मामला और गर्माने की संभावना है।