चंडीगढ़ | हरियाणा के कई परिवारों की आंखों में आज भी चिंता और इंतजार की लकीरें साफ दिखती हैं। प्रदेश के दर्जनों युवक रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मजबूरी में रूसी सेना का हिस्सा बने बैठे हैं। पढ़ाई और नौकरी के सुनहरे सपनों के साथ विदेश गए ये युवा अब युद्ध की खाइयों में फंसे हुए हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से परिवारों में उम्मीद जगी है कि शायद अब सरकार इस गंभीर मुद्दे को रूस के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखे और उनके बच्चे सुरक्षित घर लौट सकें।
परिजनों का आरोप है कि एजेंटों ने युवाओं को पढ़ाई, नौकरी और बेहतर भविष्य का झांसा देकर रूस भेजा, लेकिन वहां स्थानीय नेटवर्क ने उन्हें धोखे से सेना में भर्ती करवा दिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 44 भारतीय युवक रूसी सेना में शामिल पाए गए हैं, हालांकि हरियाणा के ग्रामीण परिवारों का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है।
रोहतक के तैमूरपुर गांव के संदीप की कहानी सबसे दर्दनाक है। सितंबर 2024 में वह चरखी दादरी के एक एजेंट के जरिए रूस पहुंचा था। वादा किया गया था कि वह पढ़ाई के साथ कुक की नौकरी करेगा, लेकिन वहां पहुंचते ही उसे हथियार पकड़ा दिए गए। हाल ही में भेजे गए उसके वीडियो में उसने कहा— “मेरी जान को खतरा है, दिन में एक बार खाना मिलता है।” इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला।
हिसार के मदनहेड़ी गांव के 28 वर्षीय सोनू की मौत की पुष्टि ड्रोन हमले में हुई। वह रूस में विदेशी भाषा का कोर्स करने गया था, लेकिन जबरन उसे मोर्चे पर तैनात कर दिया गया। कैथल के कर्मचंद और कई अन्य युवकों की मौत की पुष्टि भी इसी तरह हुई। परिवारों का कहना है कि उन्हें कभी यह भरोसा नहीं था कि पढ़ाई के बहाने विदेश गए उनके बच्चे युद्ध में भेज दिए जाएंगे।
अंबाला का मोहम्मद जावेद, फतेहाबाद के अंकित और विजय, हिसार का अमन, इन सभी का परिवार कई दिनों से उनकी एक झलक का इंतजार कर रहा है। आखिरी कॉल्स में कई युवकों ने सिर्फ इतना ही कहा, “मां, मुझे यहां कभी भी कुछ हो सकता है।”
हरियाणा के दर्जनों परिवार अब प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय से गुहार लगा रहे हैं कि रूस में फंसे युवाओं को सुरक्षित वापस लाया जाए। पुतिन की इस यात्रा से उन्हें उम्मीद है कि शायद अब सरकार उनका दर्द सुन सकेगी और इन युवाओं की घर वापसी का रास्ता खुलेगा।