नई दिल्ली | संसद के शीतकालीन सत्र 2025 में आज राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर सियासी बहस छिड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कांग्रेस पर 1937 में वंदे मातरम के कुछ हिस्सों को हटाने का आरोप लगाया। इसके बाद यह मुद्दा संसद में और सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से वंदे मातरम पर उनकी प्रतिक्रिया पूछी गई, तो उन्होंने महज चार शब्दों में जवाब दिया: “प्रियंका का भाषण सुनो।” इसके बाद राहुल गांधी बिना किसी विस्तार के वहां से चले गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि 1937 के फैजाबाद सेशन में कांग्रेस ने वंदे मातरम के कुछ हिस्से को हटाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय मुस्लिम लीग द्वारा इस गीत का विरोध किया गया था और कांग्रेस ने इस पर ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी।
इसके जवाब में कांग्रेस ने कहा कि यह निर्णय रवींद्रनाथ टैगोर के मार्गदर्शन में लिया गया था। पार्टी ने इस मामले में प्रधानमंत्री से माफी की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि पीएम मोदी के बयान ने तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी का अपमान किया, इसलिए उन्हें सार्वजनिक तौर पर माफी देनी चाहिए।
संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले भी राष्ट्रीय गीत को लेकर सियासी विवाद हुआ था। राज्यसभा सचिवालय ने सांसदों से अपील की थी कि वे ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल संसद में मर्यादा बनाए रखने के लिए सीमित करें। लेकिन कांग्रेस ने बीजेपी के नेतृत्व वाली NDA पर राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया।
यह बहस न केवल संसद में, बल्कि मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर भी सुर्खियों में है, और अगले दिनों भी इस विवाद की गूंज जारी रहने की संभावना है।