चंडीगढ़ I हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन और श्रम मंत्री अनिल विज के प्रयासों से अंबाला छावनी में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक लगभग तैयार हो चुका है। यह स्मारक उन वीरों के पराक्रम और बलिदान को समर्पित है, जिन्हें देश की आजादी की पहली लड़ाई में योगदान के बावजूद आज तक उचित मान्यता नहीं मिली।
1857 की लड़ाई के नायकों को अभी तक नहीं मिला उचित सम्मान
अनिल विज ने बताया कि लंबे समय तक यह मिथक फैलाया गया कि आजादी की लड़ाई की शुरुआत कांग्रेस ने की, जबकि कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी। विज ने कहा कि उनसे 28 वर्ष पहले ही 1857 की क्रांति में देशवासी अंग्रेजों के खिलाफ संगठित होकर लड़े, लेकिन उन शहीदों की गाथाएं आज तक जन-जन तक नहीं पहुंच पाईं।
उन्होंने कहा कि इन वीरों के बलिदान की न तो कहानियां दर्ज की गईं, न गीत लिखे गए और न ही किसी विशेष दिन को उनकी स्मृति में मनाया गया।
“सच्चाई सामने लाने के लिए 20-25 साल संघर्ष किया” : अनिल विज
मंत्री विज ने बताया कि 1857 की क्रांति में अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार कीं लोगों को पेड़ों से बांधकर गोलियों से भून दिया गया, कई को कुल्हाड़ियों के नीचे सिर रखकर मार दिया गया, कई वर्षों तक जेलों में रखा गया और कई रेजिमेंटों को भंग कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक सत्य को सामने लाने के लिए उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक लगातार संघर्ष किया।
विशाल शहीद स्मारक का निर्माण अंतिम चरण में
अनिल विज ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की सच्चाई और शहीदों के त्याग को दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से उन्होंने सरकार से शहीद स्मारक निर्माण की स्वीकृति दिलवाई।
आज यह स्मारक लगभग तैयार है और एशिया का सबसे बड़ा स्मारक माना जा रहा है।
विज ने बताया कि स्मारक की महत्ता और भव्यता को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री स्वयं करें।