Shimla, 18 December-:राष्ट्रीय पोलियो टीकाकरण दिवस के अवसर पर 21 दिसंबर 2025 (रविवार) को जिला शिमला में 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) की खुराक पिलाई जाएगी। इस अभियान के तहत जिले में 57,010 से अधिक बच्चों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान की तैयारियों को लेकर उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में जिला टीकाकरण टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई।
उपायुक्त ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य भारत की पोलियो-मुक्त स्थिति को बनाए रखना है। भारत वर्ष 2014 से पोलियो-मुक्त है, लेकिन पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो के मामले सामने आने के कारण सतर्कता आवश्यक है। इसी के मद्देनज़र यह वार्षिक अभियान चलाया जा रहा है।उन्होंने बताया कि 21 दिसंबर को बूथ दिवस के रूप में सभी निर्धारित टीकाकरण केंद्रों पर बच्चों को पोलियो की दो बूंदें पिलाई जाएंगी। इसके बाद 22 से 24 दिसंबर 2025 तक मॉप-अप राउंड के तहत स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को टीका लगाएंगे।
अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए जिला शिमला के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर विशेष बूथ स्थापित किए जाएंगे। इन स्थानों पर स्थानीय कलाकारों के माध्यम से आमजन को जागरूक भी किया जाएगा। उपायुक्त ने अभिभावकों से अपील की कि वे 21 दिसंबर को अपने नजदीकी बूथ पर 0 से 5 वर्ष आयु के सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से पोलियो ड्रॉप्स पिलाएं।
उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि अभियान के दौरान कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे। झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों, निर्माणाधीन स्थलों, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा सके।
अगले सत्र से स्कूलों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान
उपायुक्त ने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र से जिला के स्कूलों में बीमारियों की रोकथाम और स्वच्छता को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिससे बच्चों में हाइजीन के प्रति समझ विकसित हो और वे बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशवंत रांटा, डॉ. विनीत लखनपाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
पोलियो से बचाव में स्वच्छता है जरूरी
पोलियो वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क से फैलता है, विशेषकर हाथों की सही ढंग से सफाई न होने पर। यह दूषित भोजन, पानी, खांसी या छींक की बूंदों से भी फैल सकता है। खुले में शौच और दूषित जल स्रोतों के कारण इसका जोखिम बढ़ जाता है। पोलियो वायरस लंबे समय तक पानी में जीवित रह सकता है, इसलिए स्वच्छता और टीकाकरण दोनों अत्यंत आवश्यक हैं।
जिले में 743 टीकाकरण बूथ होंगे स्थापित
21 दिसंबर को जिला शिमला में कुल 743 टीकाकरण बूथ स्थापित किए जाएंगे। इनमें चिड़गांव में 71, कोटखाई 74, कुमारसैन 42, मशोबरा 138, मतियाना 72, ननखड़ी 33, नेरवा 119, रामपुर 68, सुन्नी 37, टिक्कर 66 और शिमला शहरी क्षेत्र में 43 बूथ शामिल हैं।
पोलियो क्या है
पोलियो (पोलियोमाइलाइटिस) एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और गंभीर मामलों में स्थायी लकवा या मृत्यु का कारण बन सकता है। इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन ओरल पोलियो वैक्सीन के माध्यम से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
पोलियो के लक्षण
अधिकांश मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। कुछ लोगों में बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, पेट दर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, मतली या उल्टी जैसे लक्षण हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क को प्रभावित कर लकवा पैदा कर सकता है।
रोकथाम का एकमात्र उपाय – टीकाकरण
पोलियो से बचाव के लिए समय पर और पूर्ण टीकाकरण ही सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है।