नई दिल्ली | भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी Starlink को भारत सरकार से ऑपरेशनल लाइसेंस मिल गया है। इसका सीधा असर उन ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों पर पड़ेगा, जहां अब तक मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क की पहुंच नहीं थी।
क्या है Starlink और कैसे करता है काम
Starlink, स्पेसएक्स (SpaceX) की एक परियोजना है, जो लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में तैनात हजारों छोटे सैटेलाइट्स के जरिए धरती पर इंटरनेट सेवा प्रदान करती है।
- यह तकनीक करीब 550 किमी ऊंचाई पर स्थित सैटेलाइट्स से संचालित होती है।
- लो लेटेंसी और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।
- इसका सबसे अधिक लाभ पहाड़ी क्षेत्रों, घने जंगलों और सीमावर्ती गांवों को मिलेगा, जहां परंपरागत इंटरनेट सेवा पहुंच नहीं बना पाई है।
Starlink से Jio और Airtel की साझेदारी
मार्च 2025 में Jio और Airtel ने Starlink के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। अब इस समझौते के तहत:
- Starlink के डिवाइस Jio और Airtel के आउटलेट्स पर उपलब्ध होंगे।
- Jio की टीम इंस्टॉलेशन, एक्टिवेशन और तकनीकी सहायता की जिम्मेदारी संभालेगी।
- प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल, ग्रामीण केंद्र और छोटे व्यापार हब शामिल होंगे।
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जताई उम्मीदें
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा:
- “सैटेलाइट कनेक्टिविटी भारत के डिजिटल भविष्य की नींव साबित होगी।”
- उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस सहयोग की सराहना करते हुए लिखा कि इससे नए आर्थिक और तकनीकी अवसरों के द्वार खुलेंगे।
Starlink के आने से देश को क्या लाभ
- ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में ऑनलाइन शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
- टेलीमेडिसिन और रिमोट हेल्थ सेवाएं बनेंगी सुलभ
- आपातकालीन सेवाएं और आपदा प्रबंधन में इंटरनेट की बड़ी भूमिका
- स्टार्टअप्स और उद्यमियों को मिलेगा तेज़ इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर