शिमला। शिमला जिले के जुन्गा स्थित प्राचीन राजमहल में लगी आग को लेकर पुलिस ने इसे संदिग्ध मानते हुए अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस घटना में राजमहल के भीतर स्थित पारिवारिक देवी-देवताओं का मंदिर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। शिकायतकर्ता की आशंका है कि यह आग दुर्घटनावश नहीं, बल्कि जानबूझकर लगाई गई थी।
ओल्ड जुन्गा के पैलेस चौरी निवासी खुश विक्रम सेन की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 326 (जी) के तहत एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में कहा गया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने राजमहल और मंदिर को नुकसान पहुंचाने की नीयत से आग लगाई। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, राजमहल की दूसरी मंजिल पर उनके परिवार की आराध्य देवी का प्राचीन मंदिर स्थापित है, जिसमें देवी-देवताओं की मूर्तियां और पूजा से जुड़ी सामग्री रखी हुई थी। परंपरा के अनुसार मंदिर में हर छह माह में एक बार पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है, जबकि शेष समय मंदिर बंद रहता है। आग लगने से मंदिर के साथ-साथ ऐतिहासिक संरचना को भी नुकसान पहुंचा है।
आग बुझाए जाने के बाद भी राजमहल के भीतर से धुआं निकलने की सूचना है। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में राजमहल के अंदर दबे देवता जुन्गा के मोहरों और मंदिर के अवशेषों की तलाश जारी है। क्योंथल क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग पिछले दो दिनों से कार सेवा के माध्यम से मलबा हटाने में जुटे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि देवता जुन्गा पूरे क्योंथल क्षेत्र के आराध्य देव माने जाते हैं। तत्कालीन क्योंथल रियासत का विस्तार दक्षिण में मनीमाजरा और पूर्व में रावी-पुन्नर तक था। रियासत के अंतर्गत 18 ठकुराइयां आती थीं और प्रत्येक क्षेत्र में देवता जुन्गा के मंदिर स्थापित हैं, जिनका मूल और प्रमुख मंदिर इसी प्राचीन राजमहल के भीतर स्थित है। फिलहाल पुलिस आग के कारणों की गहन जांच कर रही है और दोषियों की पहचान के लिए सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।