शिमला, समर न्यूज़ ब्यूरो-:हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलचल और तेज हो गई है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद अब राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें पंचायती राज संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया 30 अप्रैल तक पूरी करने के निर्देश दिए गए थे।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि पंचायत चुनाव संविधान में तय प्रावधानों के अनुसार समय पर कराए जाएं। अदालत ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को निर्देश देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई का पालन अनिवार्य है। इस अनुच्छेद के तहत पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराना संवैधानिक जिम्मेदारी है।हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी आदेश संविधान से ऊपर नहीं हो सकते। अदालत के अनुसार, किसी भी प्रशासनिक या आपात आदेश के आधार पर संवैधानिक जनादेश को टाला नहीं जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने चुनाव प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए थे।हालांकि राज्य सरकार का तर्क है कि मौजूदा परिस्थितियों और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से कठिन है। इसी को आधार बनाकर सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट के रुख पर अब यह तय होगा कि हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समयसीमा में होंगे या नहीं.