करनाल | करनाल में करीब 20 करोड़ रुपये के धान घोटाले में पुलिस की एसआईटी ने आढ़ती और मिलरों के बाद अब भ्रष्ट अधिकारियों तक अपनी कार्रवाई बढ़ा दी है। नौ जनवरी को गठित दूसरी एसआईटी की जिम्मेदारी एएसपी कांची सिंघल को सौंपी गई थी।
इस घोटाले में पहले से गिरफ्तार दो मिलर, शीशपाल और सुनील गोयल, और दो आढ़ती नरेश गर्ग और देवेंद्र सिंह हैं। इसके अलावा, मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली और दो कंप्यूटर ऑपरेटर पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे, जिनसे केवल 5.25 लाख रुपये की बरामदगी हुई थी। पिछले सप्ताह देवेंद्र से 2 लाख रुपये बरामद हुए। कुल मिलाकर अब तक केवल 7.25 लाख रुपये की राशि बरामद की गई है।
एसआईटी की जांच में पाया गया कि असंध प्रबंधक प्रमोद कुमार, निसिंग प्रबंधक दर्शन सिंह, वेयरहाउस तकनीकी सहायक प्रदीप कुमार, और खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक रणधीर ने फर्जी गेटपास बनाकर सरकारी धान की खरीद और भंडारण में हेराफेरी की। आरोपियों में से कुछ को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
डीएसपी राजीव कुमार ने बताया कि पहली एसआईटी केवल शहर थाना में दर्ज गेटपास फजीवाड़े मामले की जांच कर रही थी। दूसरी एसआईटी की जांच में यह खुलासा हुआ कि अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। एसआईटी ने दस्तावेज़, रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की संलिप्तता प्रमाणित की है।
एएसपी कांची सिंघल ने कहा कि घोटाले में सभी आरोपियों की भूमिका धान की खरीद, भंडारण और सरकारी प्रक्रिया में हेराफेरी तक सीमित नहीं थी। जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।