चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर चौटाला परिवार की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पूर्व बिजली मंत्री रणजीत सिंह चौटाला अब अपने भतीजे और इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला के निशाने पर आ गए हैं। रणजीत चौटाला स्वर्गीय उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के छोटे बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के भाई हैं।
कांग्रेस और निर्दलीय राजनीति के बाद रणजीत चौटाला ने भाजपा का दामन थामा था, लेकिन पार्टी में उन्हें वह सम्मान और राजनीतिक मजबूती नहीं मिल पाई, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। इसी बीच उनके हालिया बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
बताया जा रहा है कि चाचा-भतीजे के बीच विवाद की मुख्य वजह पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह हैं, जिन्होंने करीब 16 साल बाद भाजपा और कांग्रेस से किनारा कर इनेलो में वापसी की है। इनेलो ने संपत सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय संरक्षक भी नियुक्त किया है।
हिसार में अपनी राजनीतिक पकड़ दिखाने के लिए जिलों के दौरे पर निकले रणजीत चौटाला ने फतेहाबाद के भट्टू क्षेत्र के गांव किरढ़ान में एक कार्यक्रम के दौरान संपत सिंह को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वह संपत सिंह के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन लोगों को उनकी राजनीतिक शुरुआत के बारे में बताना जरूरी है। रणजीत चौटाला ने दावा किया कि संपत सिंह को देवीलाल ने निजी सहायक के रूप में रखा था और बाद में मंत्री भी बनाया।
रणजीत चौटाला ने देवीलाल की राजनीतिक भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने देश को प्रधानमंत्री तक दिए और कई नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन आज देवीलाल परिवार के पास संसद में कोई प्रतिनिधित्व नहीं बचा। उन्होंने इनेलो पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ घटनाओं ने पूरे इतिहास को बदल दिया।
रणजीत चौटाला के इस बयान पर इनेलो प्रमुख अभय चौटाला ने पलटवार करते हुए कहा कि “जिसकी जैसी सोच होती है, वैसी ही बातें करता है। जनता ने ऐसे लोगों को पहले ही नकार दिया है और अब इनके पास कुछ बचा नहीं है।”
वहीं प्रो. संपत सिंह ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि रणजीत चौटाला ऐसी छोटी बातें न करते तो उन्हें 32 साल तक राजनीतिक रूप से संघर्ष नहीं करना पड़ता।
चौटाला परिवार में लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जिससे हरियाणा की सियासत में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।