नई दिल्ली | देश में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और अब यह लद्दाख के पूरे हिस्से को पार कर चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अब यह हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के कुछ हिस्सों में पहुंच गया है, जिससे इन क्षेत्रों में लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।
अगले 48 घंटों में मानसून के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली और बाकी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहुंचने की संभावना जताई गई है। यदि अनुमान के मुताबिक 24 जून को मानसून दिल्ली में दस्तक देता है, तो यह 2013 के बाद सबसे जल्दी मानसून आगमन माना जाएगा।
इस बार मॉनसून की चाल बनी चर्चा का विषय
IMD के अनुसार, इस बार मानसून ने केरल में 24 मई को दस्तक दी थी, जो पिछले 15 वर्षों में सबसे पहले हुई शुरुआतों में से एक है। इसके बाद यह महाराष्ट्र, मुंबई और पूर्वोत्तर राज्यों में तेजी से फैला, लेकिन 29 मई से लेकर 16 जून तक इसकी गति कुछ धीमी रही। फिर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के पास बने कम दबाव के क्षेत्रों ने इसे दोबारा सक्रिय किया।
भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों के लिए भारी बारिश की चेतावनी दी है:
- उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य प्रदेश, गुजरात, कोंकण और गोवा में 26 जून तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।
- मध्य प्रदेश में 23-24 जून को अति भारी वर्षा का पूर्वानुमान।
- पूर्वोत्तर राज्यों में अगले तीन दिनों तक तेज बारिश जारी रह सकती है।
इस बार क्या रहेगा मानसून का प्रभाव?
IMD के अनुमान के अनुसार, इस बार जून से सितंबर तक देश में औसत से अधिक यानी करीब 106% बारिश हो सकती है। हालांकि, लद्दाख, हिमाचल, पूर्वोत्तर राज्यों, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पंजाब, हरियाणा, केरल और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है।
क्यों महत्वपूर्ण है मानसून?
भारत की 42% आबादी की जीविका कृषि पर निर्भर है और देश की GDP में करीब 18.2% हिस्सेदारी कृषि क्षेत्र की है। ऐसे में मानसून का संतुलित और समय पर आगमन देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।