शिमला, संजू-:शिमला से मात्र 16 किलोमीटर दूर, ढली के पास फैला एक 10 वर्ग किलोमीटर का वाटर कैचमेंट एरिया अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और इंजीनियरिंग चमत्कार के लिए जाना जाता है। यह वह क्षेत्र है जहाँ शिमला शहर को आज भी पानी की आपूर्ति हो रही है, और यहाँ के 125 साल पुराने सियोग वॉटर टैंक की वजह से यह शहर प्यास नहीं बुझा। ब्रिटिश काल में स्थापित यह टैंक आज भी ग्रेविटी के जरिए पानी सप्लाई करता है, यानी किसी पंप या मशीन की जरूरत नहीं पड़ती।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सियोग वॉटर टैंक साल 1901 में अंग्रेजों के शासन के दौरान बनाया गया था। उस समय अधिकारियों की सफाई और अनुशासन की सख्ती इस क्षेत्र की विशेषता थी। अधिकारी भ्रमण पर आने के दौरान कर्मचारियों को थूकने और शौच करने के लिए अलग डिब्बे साथ ले जाने पड़ते थे। आज भी खुले में शौच और थूकना पूरी तरह मना है। टैंक की इंजीनियरिंग और ग्रेविटी-संचालित सप्लाई आज भी पर्यावरण और तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण है।
ट्रैक और पहुंच
कैचमेंट एरिया का सफर मुख्य गेट से शुरू होता है। यहां आने वाले पर्यटक पैदल, साइकिल या इलेक्ट्रिक गोल्फ कार्ट से ट्रैक का आनंद ले सकते हैं। रास्ते में घने जंगल, शांत वातावरण और प्राकृतिक नजारे इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। कुफरी की ओर जाते समय हसन वैली सेल्फी प्वाइंट से दिखाई देने वाला घना जंगल इसी क्षेत्र का हिस्सा है। इसे एशिया के सबसे घने जंगलों में गिना जाता है।पर्यटक नियमों का पालन अनिवार्य है। यहां खाद्य सामग्री लाना मना है, कूड़ा फैलाना प्रतिबंधित है और अधिक शोर नहीं करने की अनुमति है ताकि वन्य जीवन प्रभावित न हो। आरओ रुपिंदर शर्मा के अनुसार, इस क्षेत्र में जैव विविधता बहुत समृद्ध है। यहां 166 देशी पौधों की प्रजातियां, 21 प्रकार के स्थलीय फूल, 146 पक्षियों की प्रजातियां और 54 प्रकार की तितलियां पाई जाती हैं।
शुल्क और सुविधाएं
प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति 150 रुपये है, छात्रों के लिए 100 रुपये, विदेशी पर्यटकों के लिए 300 रुपये और विदेशी छात्रों के लिए 200 रुपये। साइकिल किराया 236 रुपये से शुरू होता है। वीडियो कैमरा के लिए 1000 रुपये और डिजिटल कैमरा के लिए 100 रुपये शुल्क रखा गया है। इलेक्ट्रिक गाड़ी का किराया प्रति व्यक्ति 500 रुपये है। ट्रैक पर चलते हुए दो वॉच टावर और कई व्यू पॉइंट मिलते हैं, जिनसे हसन वैली का मनोरम दृश्य दिखाई देता है।
सियोग रेस्ट हाउस
ट्रैक पर ही अंग्रेजों के समय बना सियोग रेस्ट हाउस भी मौजूद है। यहां देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू समेत कई गणमान्य हस्तियां आ चुकी हैं। इस रेस्ट हाउस में केवल दिन में भ्रमण की अनुमति है; रात में ठहरना मना है।
जल आपूर्ति और तकनीकी विवरण
सियोग वॉटर टैंक को ढका नहीं गया है और इसमें पानी पहुंचाने के लिए किसी मशीन का इस्तेमाल नहीं होता। ढली से टैंक तक लगभग 7 किलोमीटर की सड़क पानी की पाइपलाइन पर बनाई गई है। यह पाइपलाइन ब्रिटिश काल में एडवांस स्टडीज तक जाती थी और आज भी शिमला शहर को पानी की सप्लाई करती है। फॉरेस्ट गार्ड विकास नेगी बताते हैं कि टैंक की स्वच्छता बनाए रखने के लिए पर्यटकों को विशेष अनुमति के बिना टैंक तक जाने की इजाजत नहीं है।
इस टैंक के करीब 18 प्राकृतिक जल स्रोतों में से नौ को इसमें जोड़ा गया है। इस तरह यह टैंक न केवल शहर की प्यास बुझाता है बल्कि प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाता है।
प्राकृतिक सुंदरता और संरक्षण
कैचमेंट एरिया की यात्रा में पर्यटक घने जंगल, विविध पौधे, पक्षियों और तितलियों के सुंदर दृश्य का अनुभव कर सकते हैं। क्षेत्र में शांति, हरियाली और जैव विविधता पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। यह जगह शिमला के हलचल भरे रिज और मॉल रोड से दूर, सुकून भरा अनुभव प्रदान करती है।
निष्कर्ष
सियोग वाटर कैचमेंट एरिया शिमला की प्राकृतिक सुंदरता, ब्रिटिश इंजीनियरिंग और आधुनिक पर्यावरण जागरूकता का अनूठा मिश्रण है। 125 साल पुराने सियोग वॉटर टैंक की ग्रेविटी-संचालित आपूर्ति, ऐतिहासिक रेस्ट हाउस और हरे-भरे जंगल इसे हर प्रकृति और इतिहास प्रेमी के लिए आकर्षक बनाते हैं।जब आप शिमला जाएं, तो इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल को अपनी यात्रा में शामिल करना न भूलें और इसकी शांत, हरियाली भरी दुनिया का आनंद लें।