Summer Express, नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ जारी टकराव का प्रभाव अब अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई देशों में उड़ानों के संचालन पर असर पड़ा है, जिससे हजारों फ्लाइट्स रद्द हो रही हैं और हवाई टिकटों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसके चलते दुनियाभर के यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
उड़ानों पर पड़ा व्यापक असर
जानकारी के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद क्षेत्र में अब तक 46 हजार से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 महामारी के बाद एविएशन सेक्टर को लगा यह सबसे बड़ा झटका है। मौजूदा हालात के कारण वैश्विक एयरलाइन क्षमता में करीब 10 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।
टिकटों की कीमतों में तेज उछाल
खाड़ी क्षेत्र के कई एयरपोर्ट बंद होने से उड़ानों की संख्या कम हो गई है, जिसका सीधा असर हवाई किराए पर पड़ा है। उदाहरण के तौर पर सिंगापुर से लंदन जाने वाली राउंड-ट्रिप इकॉनमी टिकट की कीमत करीब तीन गुना तक बढ़ गई है। कुछ एयरलाइनों की उड़ानों का किराया 28 हजार डॉलर तक पहुंचने की खबर है।
भारतीय यात्रियों पर ज्यादा प्रभाव
मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा असर भारतीय यात्रियों पर पड़ रहा है, क्योंकि भारत से संचालित करीब 40 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय उड़ानें मध्य पूर्व के मार्ग से गुजरती हैं। ट्रैवल कंपनियों के अनुसार टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण कई लोग अपनी यात्रा योजनाएं टालने लगे हैं।
सुरक्षा को लेकर भी बढ़ी चिंता
यात्रियों में बढ़ते किराए के साथ-साथ सुरक्षा को लेकर भी चिंता देखी जा रही है। क्षेत्र में हमलों और तनावपूर्ण माहौल के कारण कई लोग विदेश यात्रा के बजाय घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियां असामान्य हैं। मांग बनी हुई है, लेकिन उड़ानों की उपलब्धता कम होने से किराए तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से एयरलाइंस की लागत भी बढ़ गई है, जिसके चलते कई कंपनियों ने ईंधन सरचार्ज लागू कर दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में हवाई यात्रा और भी महंगी और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।