भारत के PFBR रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर परमाणु ऊर्जा में रचा नया इतिहास
Summer express, नई दिल्ली। भारत ने अपने नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है। यह उपलब्धि देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक निर्णायक चरण मानी जा रही है और इससे भारत के ऊर्जा कार्यक्रम को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत की परमाणु यात्रा का अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी तकनीक और देश के वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों की क्षमता का परिणाम है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह कदम भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश का संकेत देता है, जो भविष्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
क्रिटिकैलिटी वह अवस्था होती है जब रिएक्टर में स्व-स्थायी परमाणु विखंडन प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है। इस स्थिति में न्यूट्रॉनों की संख्या इतनी होती है कि प्रतिक्रिया बिना बाहरी हस्तक्षेप के जारी रह सकती है। हालांकि यह चरण बिजली उत्पादन की पूर्ण क्षमता को दर्शाता नहीं है, लेकिन किसी भी परमाणु संयंत्र के संचालन में इसे सबसे महत्वपूर्ण मील के पत्थरों में से एक माना जाता है।
PFBR की क्षमता 500 मेगावाट है और यह सोडियम-कूल्ड फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है। इसके निर्माण में दो दशकों से अधिक का समय लगा है। इस परियोजना को भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा संचालित किया जाता है और यह कलपक्कम स्थित इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) परिसर में स्थापित है।
यह उपलब्धि भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत को भी दर्शाती है, जिसकी परिकल्पना डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने की थी। इस तकनीक को वैश्विक स्तर पर अत्यंत उन्नत माना जाता है और वर्तमान में सीमित देशों के पास ही इसका संचालन है।
सरकार का लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 100 गीगावाट करना है। PFBR जैसे रिएक्टर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ स्वच्छ और कम कार्बन ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।