नई दिल्ली | दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजधानी में वर्षों से अधूरे पड़े 11 अस्पतालों के निर्माण और संचालन का काम अब पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा। सरकार ने इस योजना के लिए लगभग 9,000 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट तय किया है।
42 हजार नए पदों पर होगी भर्ती
इन अस्पतालों को शुरू करने के लिए डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन और अन्य स्टाफ समेत कुल 42,000 नए कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
4 स्थानों पर बनेंगे मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल
इनमें से चार जगहों – ज्वालापुरी, मादीपुर, हस्तसाल और सिरासपुर – में मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल तैयार किए जाएंगे, जहां अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
7 क्षेत्रों में होंगे ICU बेड वाले छोटे अस्पताल
बाकी सात स्थानों – शालीमार बाग, किराड़ी, सुल्तानपुरी, गीता कॉलोनी, दिलशाद गार्डन, सरिता विहार और रघुबीर नगर – में ICU बेड युक्त मीडियम लेवल अस्पताल बनाए जाएंगे, जिससे क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
रुके हुए प्रोजेक्ट को मिलेगा नया जीवन
गौरतलब है कि इन अस्पतालों का निर्माण कार्य वर्ष 2020-21 में शुरू हुआ था, लेकिन वित्तीय बाधाओं के चलते काम अधूरा रह गया। पहले इस प्रोजेक्ट की लागत 2,663 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो अब बढ़कर करीब 3,947 करोड़ रुपये हो चुकी है।
PPP मॉडल के लिए बनेगी तकनीकी रणनीति
सरकार अब एक ट्रांजैक्शन एडवाइजर की नियुक्ति करेगी जो इस परियोजना के तकनीकी, वित्तीय और कानूनी पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। इसके बाद योजना को कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग में एक नई निगरानी टीम गठित की जाएगी, जो इस पूरे प्रोजेक्ट पर नजर रखेगी और इसके क्रियान्वयन को सुचारु बनाएगी।