मध्य-पूर्व | ईरान ने दावा किया है कि भारत में विकसित एक सॉफ्टवेयर के जरिए इज़राइली खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ को खाड़ी देशों की संवेदनशील जानकारी तक पहुंच दी गई। ईरान का आरोप है कि भारत, इज़राइल और खाड़ी देशों के बीच हुई तकनीकी साझेदारी के तहत इस सॉफ्टवेयर में जानबूझकर ‘बैकडोर’ छोड़े गए, जिससे इज़राइल को एयरपोर्ट सुरक्षा, नागरिक डेटा, पासपोर्ट सिस्टम और यहां तक कि सैन्य नेटवर्क तक पहुंच मिल गई।
साझा जांच में हुआ खुलासा
ईरान, चीन और रूस के साइबर विशेषज्ञों की एक साझा जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर में कुछ ऐसे कोड मौजूद हैं, जो इज़राइल को पासवर्ड, मूवमेंट ट्रैकिंग और हथियार नियंत्रण जैसी अत्यधिक संवेदनशील जानकारियों तक सीधी पहुंच प्रदान करते हैं। यह सॉफ्टवेयर कथित रूप से सऊदी अरब, कुवैत, कतर और यूएई में वर्षों से इस्तेमाल हो रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों में हलचल
ईरान ने यह भी आरोप लगाया है कि इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से कुछ मामलों में सैन्य उपकरणों को भी रिमोटली संचालित किया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत की सरकारों ने अपने-अपने आईटी ढांचे का ऑडिट शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है और जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
भारत और इज़राइल की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं
फिलहाल भारत या इज़राइल की सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा कूटनीतिक और तकनीकी विवाद खड़ा कर सकता है।