Mandi, 30 June — विश्वकर्मा चौक क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग द्वारा रॉक बोल्टिंग तकनीक से महज एक महीने पहले तैयार किया गया करीब डेढ़ करोड़ रुपये का डंगा अब बरसात की पहली बौछार भी नहीं झेल सका। डंगे के क्षतिग्रस्त होते ही आसपास के पांच घरों पर फिर से खतरा मंडराने लगा है, जिससे लोग दहशत में हैं।
यह वही इलाका है जो 14 अगस्त 2023 के भूस्खलन में तबाह हो गया था। प्रशासन ने तब से करीब दो वर्षों तक तिरपाल बिछाकर हालात संभाले रखे और मार्च 2025 में यहां रॉक बोल्टिंग तकनीक से डंगा निर्माण कार्य शुरू किया, जिसे मई 2025 में पूरा बताया गया। निर्माण कंपनी ने दावा किया था कि यह तकनीक स्थायी समाधान है — लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।
स्थानीय निवासियों की चिंता और आक्रोश
निवासी नरेंद्र राणा और राणा रणपत सिंह ने बताया कि डंगा बनने के बाद उन्हें कुछ राहत महसूस हुई थी, लेकिन अब फिर से उनका घर खतरे में आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण में लापरवाही बरती गई और प्रशासन ने गुणवत्ता की जांच नहीं की।
“अब हम फिर उसी डर में जीने को मजबूर हैं,” उन्होंने कहा। साथ ही, प्रशासन से तत्काल सुरक्षा इंतजाम और जिम्मेदार कंपनी पर कार्रवाई की मांग की है।“
डेढ़ साल बाद लौटे थे घर, अब फिर उजड़ने का डर”
प्रभावित परिवारों में से धीरज महाजन और अनीता ने बताया कि भूस्खलन के बाद वे करीब डेढ़ साल तक बेघर रहे। डंगा बनने के बाद जब वे अपने घर लौटे और उसे दोबारा बसाना शुरू किया, तो एक बार फिर से वही डर लौट आया है।
पीडब्ल्यूडी का पक्ष: कंपनी को नहीं हुआ भुगतान, मरम्मत का आदेश जारी
लोक निर्माण विभाग मंडी मंडल के अधिशाषी अभियंता ई. डीके वर्मा ने बताया कि डंगा क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही निर्माण कंपनी को तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, और यह कार्य मंगलवार से शुरू किया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी को अब तक कोई भुगतान नहीं किया गया है। प्रारंभिक जांच में पानी का रिसाव डंगे को नुकसान पहुंचाने का मुख्य कारण माना जा रहा है, जिसे अब स्थायी समाधान के तहत ठीक किया जाएगा।