Summer express/कुरुक्षेत्र, गुरदीप सिंह गुजराल -:शनिचरी अमावस्या के अवसर पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के पवित्र ब्रह्मसरोवर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। हरियाणा सहित पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। सुबह से ही ब्रह्मसरोवर के घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा।
मान्यता है कि अमावस्या के दिन ब्रह्मसरोवर में स्नान कर दान-पुण्य करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र जल में डुबकी लगाई और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने पितरों की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान भी किया।ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश गोस्वामी के अनुसार इस बार की शनिचरी अमावस्या अत्यंत दुर्लभ संयोग लेकर आई है। उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ अमावस्या, शनिवार और शनि जयंती का महासंयोग एक साथ बनने से इस दिन का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। साथ ही वट सावित्री व्रत भी इसी दिन पड़ने से यह संयोग और अधिक विशेष माना जा रहा है।पंडित गोस्वामी ने बताया कि ऐसा त्रिवेणी संयोग करीब 18 वर्षों बाद बना है। ज्योतिषीय दृष्टि से इसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन शनि देव की पूजा करने, दान देने और गरीबों की सहायता करने से शनि दोषों से राहत मिलने की मान्यता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को काले तिल, काली उड़द, काले वस्त्र, छाता और जूते-चप्पल का दान करने की सलाह दी। इसके अलावा शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने का भी विशेष महत्व बताया गया।
महाराष्ट्र से आई एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि वह विशेष रूप से ब्रह्मसरोवर में स्नान करने के लिए कुरुक्षेत्र पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थान की महिमा दूर-दूर तक प्रसिद्ध है और यहां आकर पूजा-अर्चना करने से मन को शांति मिलती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस विशेष संयोग में किए गए स्नान, दान और पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि आती है।