Summer express, नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती भीषण गर्मी के बीच वैज्ञानिकों ने एक बड़े जलवायु संकट की चेतावनी दी है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रहा ‘सुपर एल-नीनो’ भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। आशंका जताई जा रही है कि यह घटना 150 साल पहले आए विनाशकारी एल-नीनो से भी अधिक असर डाल सकती है।
इस समय दिल्ली-एनसीआर, उत्तर भारत और कई अन्य राज्यों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। कई शहरों में लू के हालात बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश के बांदा में लगातार दूसरे दिन तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि अहमदाबाद, नागपुर और विदर्भ क्षेत्र भी तेज गर्मी की चपेट में हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो ‘सुपर एल-नीनो’ का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह स्थिति और मजबूत हुई तो दक्षिण-पश्चिम मानसून पर बड़ा असर पड़ सकता है। इससे देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा होने की आशंका है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह मौसमीय बदलाव 1877 के ऐतिहासिक एल-नीनो से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। उस समय दुनिया के कई हिस्सों में भयंकर सूखा और अकाल जैसी स्थिति पैदा हुई थी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में लगातार बढ़ रही गर्मी के पीछे कई स्थानीय कारण भी जिम्मेदार हैं। लंबे समय तक शुष्क मौसम, बादलों की कमी, कंक्रीट के बढ़ते ढांचे, वाहनों और एयर कंडीशनरों से निकलने वाली गर्मी ने शहरों को ‘हीट आइलैंड’ में बदल दिया है, जहां तापमान सामान्य से अधिक दर्ज हो रहा है।
मौसम विभाग ने पहले ही कई राज्यों में लू और भीषण लू का अलर्ट जारी किया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के अनुसार मई से जुलाई 2026 के बीच एल-नीनो बनने की संभावना 82 प्रतिशत तक है, जबकि इसके अगले साल की शुरुआत तक बने रहने की आशंका 96 प्रतिशत जताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एल-नीनो का सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ता है। भारत की करीब 70 प्रतिशत वार्षिक बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है। यदि मानसून कमजोर पड़ता है, तो खेती और जल संसाधनों पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। खासकर खरीफ फसलों पर निर्भर किसानों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, इस बार सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं, जबकि दक्षिण और तटीय इलाकों में अत्यधिक बारिश से बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने लोगों से गर्मी के दौरान सतर्क रहने, पर्याप्त पानी पीने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।