Summer express, अंकुर कपूर , अंबाला | हरियाणा की युवा नेत्री एवं अंबाला की बेटी चित्रा सरवारा ने देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों, बेलगाम महंगाई और शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवालों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज देश का आम नागरिक दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर महंगाई लगातार लोगों की कमर तोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर युवाओं का भविष्य भी लगातार अव्यवस्थाओं और विवादों की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।
चित्रा सरवारा ने कहा कि बीते दस दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी हुई है, जिसने हर वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि 15 मई को तीन रुपये, 19 मई को 90 पैसे, 23 मई को 87 पैसे और अब 25 मई को पेट्रोल में 2.61 रुपये तथा डीजल में 2.71 रुपये की वृद्धि ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण रखने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल केवल ईंधन नहीं हैं, बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके दाम बढ़ने का असर परिवहन, खाद्य सामग्री, कृषि, छोटे व्यापार, उद्योग और आम घरेलू खर्च तक हर क्षेत्र पर पड़ता है। आज स्थिति यह है कि मजदूर से लेकर मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारी तक हर व्यक्ति आर्थिक दबाव महसूस कर रहा है।
चित्रा सरवारा ने कहा कि आज सरकार पेट्रोल पर लगभग 23 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 21 रुपये टैक्स वसूल रही है, जबकि पूर्ववर्ती समय में एक्साइज ड्यूटी का बोझ काफी कम था। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से अत्यधिक टैक्स वसूली कर आर्थिक कमजोरियों और नीतिगत विफलताओं को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और यूरिया जैसी आवश्यक वस्तुएं इस स्तर तक महंगी हुई हैं कि आम परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है। रसोई से लेकर रोजमर्रा की यात्रा तक हर चीज महंगी हो गई है और इसका सबसे अधिक असर निम्न एवं मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है।
चित्रा सरवारा ने शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले पेपर लीक, फिर भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियां और अब सीबीएसई की उत्तर पुस्तिका बदलने जैसे आरोप देश की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई छात्र यह कह रहा है कि उसकी उत्तर पुस्तिका बदल दी गई और उसमें उसकी हैंडराइटिंग तक नहीं है, तो यह केवल एक छात्र का मामला नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।
उन्होंने कहा कि देश का युवा लगातार असुरक्षा और असमंजस के माहौल में जी रहा है। कभी भर्ती परीक्षाएं रद्द होती हैं, कभी पेपर लीक होते हैं और कभी परीक्षा परिणामों को लेकर विवाद खड़े हो जाते हैं। इससे मेहनत करने वाले लाखों विद्यार्थियों का मनोबल टूट रहा है।
चित्रा सरवारा ने सवाल उठाया कि आखिर शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा? युवाओं के भविष्य के साथ लगातार हो रहे खिलवाड़ पर सरकार की चुप्पी क्यों है? उन्होंने कहा कि एक मजबूत राष्ट्र की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता पर टिकी होती है, लेकिन आज दोनों ही गंभीर चुनौतियों से गुजर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को केवल घोषणाओं और प्रचार तक सीमित रहने की बजाय जमीनी स्तर पर जनता को राहत देने वाले ठोस कदम उठाने चाहिए। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की गिरती विश्वसनीयता आज देश के सबसे बड़े मुद्दे बन चुके हैं और जनता अब इन सवालों का जवाब चाहती है।