Summer express, नई दिल्ली। तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में 17 वर्षीय नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म और हत्या के सनसनीखेज मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी धर्ममुनीश्वरन को दोहरी फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने महज 75 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी कर यह फैसला दिया, जिसे राज्य में फास्ट ट्रैक न्याय की बड़ी मिसाल माना जा रहा है।
यह मामला तूतीकोरिन जिले के वेदानथम गांव का है, जहां मार्च महीने में एक छात्रा शौच के लिए घर से बाहर गई थी। इसी दौरान आरोपी ने उसे रास्ते में रोककर पहले दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था और पुलिस ने जांच के लिए विशेष टीम गठित की थी।
शुरुआत में पुलिस के पास कोई ठोस सुराग नहीं था। इसके बाद जांच टीम ने गांव और शहर के बीच लगे करीब एक हजार घंटे के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसी दौरान एक विंडमिल फार्म में लगे कैमरे की फुटेज से आरोपी की पहचान संभव हो सकी। फुटेज में धर्ममुनीश्वरन 10 मार्च की दोपहर गांव में प्रवेश करता और अगले दिन सुबह गांव से बाहर निकलता दिखाई दिया।
पुलिस ने आरोपी की चेकदार शर्ट के आधार पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। जांच के दौरान शर्ट से मिले खून के नमूने पीड़िता के ब्लड ग्रुप से मेल खा गए। वहीं डीएनए जांच में पीड़िता से लिए गए सैंपल आरोपी से मैच होने के बाद मामला पूरी तरह स्पष्ट हो गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने वारदात वाली रात Ramanathapuram जिले के पार्थिबनूर इलाके से एक बाइक चोरी की थी और पहचान छिपाने के लिए उसका नंबर प्लेट भी बदल दिया था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी पहले से इलाके की रेकी कर रहा था और फरवरी से लगातार गांव के आसपास आता-जाता रहा था।
मामले में पुलिस ने केवल 21 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी थी। अदालत ने फोरेंसिक साक्ष्यों, डीएनए रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज को अहम आधार मानते हुए दोषी को दोहरी मौत की सजा सुनाई। इस फैसले को लेकर राज्यभर में चर्चा हो रही है और इसे महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त संदेश माना जा रहा है।