Summer express, राकेश कुमार शर्मा , करनाल। हरियाणा के करनाल में आयोजित राष्ट्रीय बागवानी सम्मेलन ने कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान में शुरू हुए चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, नीति निर्माता और प्रगतिशील किसान एक मंच पर जुटे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं और आधुनिक तकनीक आधारित खेती को भविष्य की जरूरत बताया।
“उद्यानिकी फसलों हेतु गुणवत्तापूर्ण बीज एवं रोपण सामग्री का रणनीतिक प्रतिमान” विषय पर आयोजित यह सम्मेलन 28 से 31 मई तक चलेगा। सम्मेलन में गुणवत्तापूर्ण बीज, रोगमुक्त पौध सामग्री, जलवायु परिवर्तन, नर्सरी प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों पर मंथन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब कृषि क्षेत्र आधुनिक और आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने घोषणा की कि हरियाणा में 14 नए हॉर्टिकल्चर साइंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां किसानों को उन्नत पौध सामग्री, वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बागवानी फसलों में नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे में भी बढ़ोतरी का ऐलान किया। अब फलों की फसलों के नुकसान पर किसानों को 50 हजार रुपये प्रति एकड़ और सब्जियों व मसालों की फसलों पर 40 हजार रुपये प्रति एकड़ तक सहायता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि ड्रिप इरीगेशन, पॉलीहाउस, नेट हाउस, हाई डेंसिटी प्लांटेशन और टिश्यू कल्चर जैसी तकनीकें किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। गुणवत्तापूर्ण बीज और रोगमुक्त पौध सामग्री से उत्पादन में 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है, जबकि बागवानी फसलों में यह बढ़ोतरी 40 प्रतिशत तक हो सकती है।
महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुरेश मल्होत्रा ने बताया कि विश्वविद्यालय पिछले चार वर्षों में किसानों को 25 लाख से अधिक गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध करा चुका है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों में नई बीमारियां सामने आ रही हैं, जिनसे निपटने के लिए वैज्ञानिक शोध और आधुनिक तकनीक बेहद जरूरी है।
कृषि वैज्ञानिक प्रेम नारायण माथुर ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि स्थानीय बाजारों से निम्न गुणवत्ता वाले बीज खरीदने से उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने सरकार द्वारा स्थापित किए जा रहे गुणवत्ता आधारित प्लांटिंग मटेरियल केंद्रों को किसानों के लिए लाभकारी बताया।
सम्मेलन में 150 से अधिक वैज्ञानिक, शिक्षाविद, उद्योग प्रतिनिधि और प्रगतिशील किसान भाग ले रहे हैं। तकनीकी सत्रों और पैनल चर्चाओं में सतत बागवानी विकास, रोग नियंत्रण और आधुनिक बीज उत्पादन तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान हरियाणा के कई प्रगतिशील किसानों को “उद्यान रत्न पुरस्कार-2026” से सम्मानित भी किया गया, जिन्होंने आधुनिक तकनीकों के जरिए बागवानी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।