Summer express, नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार में पीली धातु की चमक बरकरार रही। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में भारत में सोने की कीमतों में 4.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 1.4 प्रतिशत तक सस्ता हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार मई के अंत तक वैश्विक बाजार में सोने का भाव 4,546 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। अधिकांश प्रमुख मुद्राओं में सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली, लेकिन भारत और तुर्की जैसे बाजारों में स्थानीय परिस्थितियों और मुद्रा की कमजोरी के चलते कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
भूराजनीतिक तनाव ने बढ़ाई चमक
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ‘गोल्ड मार्केट कमेंट्री’ रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण भारतीय निवेशकों का रुझान सोने की ओर बढ़ा। इसका असर घरेलू कीमतों पर साफ दिखाई दिया।
29 मई तक भारतीय बाजार में सोने का सालाना रिटर्न (Year-to-Date Return) 17.6 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो निवेशकों के लिए मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है।
मांग बनी हुई है मजबूत
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद भारत, चीन और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से लगातार बनी हुई मांग सोने को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भौतिक सोने की मांग ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होती है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद भी कई अवसरों पर सोने ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया है। ऐसे में संभावित दर वृद्धि को सोने के लिए पूरी तरह नकारात्मक संकेत नहीं माना जा सकता।
बाजार में दिख रहे नरमी के संकेत
हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि निकट भविष्य में सोने को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भारत, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे प्रमुख बाजारों में मांग में नरमी के संकेत मिले हैं। मई के दौरान ग्लोबल गोल्ड ETF में निवेश प्रवाह भी अपेक्षाकृत धीमा रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे दामों के कारण खुदरा खरीदार फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे भौतिक मांग पर असर पड़ सकता है।
ऊर्जा बाजार बना सबसे बड़ा जोखिम
रिपोर्ट में ऊर्जा क्षेत्र को सोने के लिए निकट अवधि का सबसे बड़ा जोखिम बताया गया है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आता है तो अमेरिकी डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम, अमेरिकी मौद्रिक नीति और ऊर्जा बाजार की दिशा सोने की कीमतों की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।