Summer express, रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय , रोहतक ने परीक्षा मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए डेंटल कॉलेज के ओरल सर्जरी विभाग के दो परीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों परीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
मामला बीडीएस अंतिम वर्ष के मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विषय की परीक्षा से जुड़ा है। कुछ समय पहले छात्रों के एक समूह ने कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल से मुलाकात कर मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। छात्रों का आरोप था कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं किया गया और उन्हें अपेक्षा से काफी कम अंक दिए गए हैं।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कुलपति ने परीक्षा नियंत्रक को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच के दौरान संबंधित परीक्षकों द्वारा जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं में कई त्रुटियां और मूल्यांकन संबंधी कमियां सामने आईं। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने विवादित उत्तर पुस्तिकाओं को पुनर्मूल्यांकन के लिए दूसरे सरकारी डेंटल कॉलेज की वरिष्ठ फैकल्टी के पास भेज दिया।
पुनर्मूल्यांकन के दौरान कुल 84 उत्तर पुस्तिकाओं की समीक्षा की गई। जांच में मूल्यांकन प्रक्रिया में खामियां पाए जाने के बाद विश्वविद्यालय ने आवश्यक संशोधन करते हुए प्रभावित छात्रों को औसत अंक प्रदान किए और संशोधित परीक्षा परिणाम जारी किया। इस फैसले से छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना विश्वविद्यालय की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। यदि आगे की जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमों के तहत और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालय की इस कार्रवाई को छात्रों के हितों की रक्षा और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों में न्याय और पारदर्शिता को लेकर विश्वास भी मजबूत हुआ है।