Summer express/शिमला-:अब परिवार या रिश्तेदारी में किसी बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) के माध्यम से पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि अंतर्देशीय रिश्तेदारी (इन-कंट्री रिलेटिव एडॉप्शन) और सौतेले माता-पिता (स्टेप-पैरेंट एडॉप्शन) द्वारा दत्तक ग्रहण के सभी मामलों में इच्छुक अभिभावकों को सबसे पहले सीएआरए की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद जिला दंडाधिकारी द्वारा दत्तक ग्रहण प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए किसी प्रकार का पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि पहले कई मामलों में परिवार या रिश्तेदारी के भीतर बच्चों को बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए गोद ले लिया जाता था, जिससे भविष्य में उत्तराधिकार, अभिभावकीय अधिकार और अन्य कानूनी मामलों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नए नियमों के तहत सीएआरए के माध्यम से दत्तक ग्रहण कराने पर बच्चे और दत्तक माता-पिता दोनों को पूर्ण कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं तथा बच्चे का भविष्य अधिक सुरक्षित बनता है।उन्होंने समाज के सक्षम और जागरूक लोगों से शिशु गृहों एवं आश्रमों में रह रहे बच्चों को परिवार का स्नेह देने के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, स्थायी और पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना है, जिससे उसका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।उपायुक्त ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों से ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ योजना के अंतर्गत भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 20 दिसंबर 2022 से एक सितंबर 2025 तक 25 बच्चों को योग्य भावी अभिभावकों के माध्यम से सफलतापूर्वक दत्तक ग्रहण कराया जा चुका है। यह पहल जरूरतमंद बच्चों को परिवार का संरक्षण और बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल ने बताया कि बच्चा गोद लेने के लिए आवेदन करने वाले अभिभावकों का चयन निर्धारित नियमों एवं पात्रता के आधार पर किया जाता है। सभी आवेदनों की जांच के बाद मेरिट के अनुसार दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाती है। केवल वही अभिभावक पात्र माने जाते हैं जो अधिनियम एवं सीएआरए के दिशा-निर्देशों की सभी शर्तों को पूरा करते हैं।उन्होंने बताया कि भारत में रिश्तेदारी के भीतर दत्तक ग्रहण भी किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा सीएआरए द्वारा निर्धारित दत्तक ग्रहण विनियमों के अनुसार किया जाता है। इस प्रक्रिया में जैविक माता-पिता अथवा वैध अभिभावक की सहमति, दत्तक ग्रहण करने वाले अभिभावकों की पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य है। यदि बच्चा पांच वर्ष या उससे अधिक आयु का है तो उसकी सहमति भी आवश्यक होती है। दत्तक ग्रहण पूर्ण होने के बाद बच्चे को दत्तक माता-पिता की संतान के समान पालन-पोषण, शिक्षा, उत्तराधिकार तथा अन्य सभी वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाते हैं।
सौतेले माता-पिता द्वारा दत्तक ग्रहण के संबंध में भी स्पष्ट कानूनी प्रावधान लागू हैं। पुनर्विवाह की स्थिति में यदि सौतेले माता या पिता बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेना चाहते हैं, तो जैविक अभिभावकों की आवश्यक सहमति, दस्तावेजों का सत्यापन और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति अनिवार्य होती है। आदेश जारी होने के बाद बच्चा सौतेले माता-पिता की वैध संतान माना जाता है और उसे सभी कानूनी अधिकार प्राप्त हो जाते हैं।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी इंदु शर्मा ने बताया कि भारतीय नागरिकों के साथ-साथ एनआरआई और विदेशी नागरिक भी निर्धारित नियमों के अनुसार बच्चा गोद ले सकते हैं। विवाहित दंपति, एकल अभिभावक तथा पात्र दंपति सभी आवेदन कर सकते हैं। हालांकि विवाहित दंपति के विवाह को कम से कम दो वर्ष पूरे होना आवश्यक है। इसके अलावा अभिभावकों का स्वस्थ होना, आर्थिक रूप से सक्षम होना तथा बच्चे और अभिभावकों की आयु में न्यूनतम 25 वर्ष का अंतर होना जरूरी है।उन्होंने बताया कि आवेदन के दौरान परिवार का फोटो, पैन कार्ड, जन्म तिथि प्रमाण-पत्र, आधार या अन्य पहचान-पत्र, आयकर विवरण, मेडिकल प्रमाण-पत्र, विवाह अथवा तलाक संबंधी दस्तावेज तथा अन्य आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करने होते हैं। यदि आवेदक की पांच वर्ष से अधिक आयु का कोई बच्चा पहले से है, तो उसकी सहमति भी ली जाती है।उन्होंने कहा कि भारत में दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 तथा किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के तहत संचालित होती है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण इस प्रक्रिया का संचालन करता है। हिमाचल प्रदेश में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी के माध्यम से सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर बच्चों को योग्य परिवारों से जोड़ा जाता है।