Summer express/धर्मशाला, राहुल: – धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्मानी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से युवाओं की मानसिकता सरकारी नौकरी तक सीमित हो गई है। उन्होंने कहा कि कई युवा अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय केवल सरकारी नौकरी की तैयारी और इंतजार में निकाल देते हैं, जबकि आज के दौर में कौशल आधारित रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को अपेक्षित सुरक्षा नहीं मिल पाई, जिसके कारण युवाओं का रुझान सरकारी नौकरियों की ओर और बढ़ा है। हालांकि प्रदेश और देश के विकास के लिए यह जरूरी है कि युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाए।
राजेश धर्मानी ने कहा कि वर्षों तक विकास का पैमाना नए स्कूल, आईटीआई और सरकारी संस्थान खोलना माना गया, लेकिन अब आवश्यकता संस्थानों की संख्या बढ़ाने की नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता सुधारने की है। उन्होंने कहा कि यदि सीमित संख्या में आधुनिक और संसाधनयुक्त शिक्षण संस्थान विकसित किए जाएं तो छात्रों को कहीं बेहतर शिक्षा और प्रशिक्षण मिल सकता है।राजेश धर्मानी ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति भी एक बड़ी चुनौती है। सरकार की अधिकांश आय वेतन और पेंशन पर खर्च हो जाती है, जिससे विकास और नए रोजगार सृजन के लिए संसाधन सीमित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि फील्ड स्तर पर रोजगार देने वाले कई पद खाली हैं, जबकि ऊपरी स्तर के पदों पर खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।उन्होंने पूर्व की स्किल डेवलपमेंट परियोजनाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई स्थानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर भवन और संसाधन तो तैयार कर दिए गए, लेकिन प्रशिक्षण की स्थायी व्यवस्था नहीं बनाई गई। धर्मशाला और नगरोटा बगवां सहित कई स्थानों पर बने स्किल सेंटर लंबे समय तक खाली पड़े रहे। सरकार ने ऐसे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा कर निष्क्रिय केंद्रों को समाप्त किया है और नए ट्रेनिंग पार्टनर्स का पंजीकरण पूरा कर लिया है।उन्होंने कहा कि भारत सरकार से लक्ष्य मिलते ही प्रदेश में स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों को नए स्वरूप में शुरू किया जाएगा। साथ ही निजी उद्योगों और संस्थानों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि युवाओं को प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी मिल सकें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कौशल आधारित शिक्षा ही हिमाचल के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।