Summer express/धर्मशाला,राहुल-:धर्मशाला में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच ऐतिहासिक कांगड़ा संग्रहालय एक बार फिर भूस्खलन की चपेट में आ गया है। संग्रहालय के पीछे की पहाड़ी से अचानक मलबा और एक विशाल पेड़ नीचे गिरने से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था और न ही किसी वाहन को नुकसान पहुंचा। हालांकि इस घटना ने संग्रहालय की सुरक्षा और वहां संरक्षित बहुमूल्य ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
जानकारी के अनुसार सुबह के समय संग्रहालय के पीछे स्थित पहाड़ी से पहले छोटे-छोटे पत्थर गिरने शुरू हुए, जिसके कुछ ही मिनट बाद अचानक बड़ा भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा नीचे आया और उसके साथ एक विशाल पेड़ भी गिर गया। स्थिति को देखते हुए आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत संबंधित विभागों और प्रशासन को सूचना दी। एहतियात के तौर पर बस अड्डे के समीप खड़े वाहनों को पहले ही सुरक्षित स्थान पर हटा दिया गया था, जिससे किसी बड़े हादसे से बचाव हो गया।होमगार्ड जवान कुलवंत सिंह ने बताया कि सुबह लगभग 8:35 बजे भूस्खलन की घटना हुई। सूचना मिलते ही संबंधित विभागों को अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी इसी क्षेत्र में भूस्खलन हुआ था, जिसके बाद सुरक्षा दीवार बनाने का कार्य शुरू किया गया था, लेकिन यह कार्य अभी तक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उनका मानना है कि यदि सुरक्षा दीवार को अधिक मजबूत और वैज्ञानिक तरीके से बनाया जाता तो खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता था। उन्होंने आशंका जताई कि यदि लगातार बारिश जारी रही तो संग्रहालय परिसर पर खतरा और बढ़ सकता है।
धर्मशाला बस अड्डा प्रभारी विनोद चंदेल ने बताया कि सुबह करीब 8:15 से 8:20 बजे के बीच पहाड़ी से पत्थर गिरने लगे थे। स्थिति को भांपते हुए बस अड्डे के पास खड़े वाहनों को तुरंत हटाने का निर्णय लिया गया। कुछ ही देर बाद बड़ा भूस्खलन हुआ और एक विशाल पेड़ नीचे आ गिरा। उन्होंने कहा कि समय रहते सतर्कता बरतने के कारण किसी तरह की जनहानि या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ। घटना की जानकारी तत्काल क्षेत्रीय प्रबंधक और संबंधित अधिकारियों को दे दी गई।
कांगड़ा संग्रहालय की क्यूरेटर डॉ. रितु मलकोटिया ने बताया कि कार्यालय पहुंचने पर उन्हें भूस्खलन की सूचना मिली, जिसके बाद प्रशासन और संबंधित विभागों से तुरंत संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष हुए भूस्खलन के बाद सुरक्षा कार्य शुरू किए गए थे, लेकिन इस बार बस अड्डे की ओर का हिस्सा भी प्रभावित हो गया है। उनके अनुसार संग्रहालय भवन और उसमें सुरक्षित करोड़ों रुपये मूल्य की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी और प्रभावी उपाय करना बेहद आवश्यक है।
इस बीच उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि जिस स्थान पर पहले भूस्खलन हुआ था, वहां लोक निर्माण विभाग (PWD) को तत्काल मरम्मत और सुरक्षा कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। अब उसी क्षेत्र के आगे फिर से भूस्खलन होने से ऊपर स्थित संपत्तियों पर खतरा बढ़ गया है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को मौके का दोबारा निरीक्षण कर विस्तृत आकलन रिपोर्ट तैयार करने और तत्काल किए जा सकने वाले सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद बिना देरी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि संग्रहालय और आसपास के क्षेत्र को भविष्य में किसी बड़े नुकसान से सुरक्षित रखा जा सके।