Summer vमंडी/धर्मवीर-:पिछले कुछ सालों से प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हिमाचल के कई विद्यालय आज भी पुनर्वास और रखरखाव के बिना बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं। मंडी जिला में प्राइमरी व मिडिल स्कूल तवाराफी भी ऐसे ही विद्यालयों में शामिल है, जो व्यवस्था परिवर्तन के दौर में खुद को हालत को भी बदलता देखना चाहते हैं। तवाराफी के यह स्कूल शिक्षा खंड सदर के तहत आते हैं। दोनों स्कूल दो-दो बार आपदा का दंश झेल चुके हैं, लेकिन आज तक यहां सुरक्षा दीवार नहीं लग पाई है। दरअसल, साल 2023 में आपदा के दौरान स्कूल परिसर के साथ सटे नाले में आई बाढ़ ने सुरक्षा दीवार को ध्वस्त कर दिया था। इस आपदा में मुख्याध्यापक कक्ष भी पूरी तरह से बह गया था, जिसका पुनर्निर्माण भी नहीं हो सका है। एसएमसी प्रधान खोविंद्र ठाकुर और स्थानीय निवासी बालक राम ने बताया कि तवाराफी स्कूल से नेशनल खिलाड़ी तक निकले हैं, लेकिन सरकार की अनदेखी के चलते स्कूल और इसका मैदान आज खंडहर सा प्रतीत होता है। वहीं प्रार्थना सभा और सांस्कृतिक गतिविधियों के तैयार किया गया मंच भी बदहाली की झाड़ियों में गुम सा गया है। इन झाड़ियों को देखकर सरकारों के गुणात्मक शिक्षा के दावे पूरी तरह से हवा हवाई नजर आते है।
प्राइमरी स्कूल तवाराफी की बात करें तो यहां पर एक भवन पहले ही खंडहर हो चुका है, वहीं करीब 25 वर्ष पहले बना दूसरा भवन भी भरी बरसात में टपकती छतों बीच अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। इतना ही नहीं स्कूल की छत जर्जर होने के बाद गिरना भी शुरू हो चुकी हैं, जो नोनिहालों की सुरक्षा को सीधे तौर पर बयां कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चें यहां मौत के मुंह में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, क्योंकि एक ओर स्कूल भवन जर्जर हैं तो दुसरी तरफ नाले से सांपों-बिच्छू का डर हर समय बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सुरक्षा दीवार निर्माण के लिए दो लाख रुपये की राशि पंचायत के पास उपलब्ध रही, लेकिन इसके बावजूद भी आज दिन तक इसका कार्य शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग को दोनो स्कूलों को नाले के स्तर से 20 फीट ऊंचा उठाने का भी सुझाव दिया है, ताकि आने वाले समय में फलड़ का खतरा न बना रहे। स्कूल प्रबंधन समिति, अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग व सरकार से मांग की है कि दोनों स्कूलों में जल्द से जल्द सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जाए और आपदा से क्षतिग्रस्त भवनों की रखरखाव भी किया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
क्या कहना है शिक्षा विभाग का:
वहीं इस बारे में प्रारंभिक शिक्षा उप निदेशक मंडी डॉ सुनील दत्त से बात की गई तो उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त स्कूलों की सुरक्षा दीवार के लिए अब पंचायती राज विभाग की ओर से 6 लाख की राशि स्वीकृत की गई है। बरसात के बाद स्थानीय पंचायत के द्वारा सुरक्षा दीवार का काम शुरू कर दिया जाएगा।