Summer express ,अंकुर कपूर, अंबाला। किसानों को कृषि, पशुपालन और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे किसान जागरूकता शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों से सीधे संवाद का माध्यम बन रहे हैं। इन शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी गांवों में पहुंचकर किसानों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुन रहे हैं। हालांकि, शिविरों के दौरान किसानों ने बढ़ती लागत और कम आमदनी को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
मार्केट कमेटी के चेयरमैन जसविंदर सिंह ने बताया कि किसान जागरूकता अभियान की शुरुआत 7 अगस्त को नग्गल गांव से हुई थी और अब यह पांचवें चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। शिविरों में किसानों की समस्याओं और सुझावों को दर्ज कर संबंधित विभागों तक भेजा जाता है, ताकि उन पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने बताया कि पंजोखरा साहिब और माणकपुर गांव में दो शिविर अभी आयोजित किए जाने हैं। अभियान का समापन 31 अगस्त को बड़ी सब्जी मंडी में किया जाएगा।
शिविर में किसानों ने सरकारी योजनाओं के साथ-साथ पशुपालन से जुड़ी आर्थिक परेशानियों को भी प्रमुखता से उठाया। किसानों का कहना है कि पशुओं की खुराक लगातार महंगी हो रही है, जबकि दूध का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। किसानों के अनुसार वीटा मिल्क प्लांट में छह फैट वाले दूध की खरीद करीब 50 रुपये प्रति लीटर की दर से हो रही है, जबकि पशुओं की प्रमुख खुराक खल और बिनौला के दाम करीब 57 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। किसानों ने दूध की कीमत बढ़ाकर कम से कम 12 से 15 रुपये प्रति फैट किए जाने की मांग की है।
किसानों ने बैंकों से पशुपालन के लिए मिलने वाले ऋण को लेकर भी परेशानी बताई। उनका कहना है कि बाजार में दुधारू पशुओं की कीमत अधिक होने के बावजूद बैंक उसी अनुपात में ऋण उपलब्ध नहीं कराते, जिससे पशुपालकों को पशु खरीदने में आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
गोबिंदगढ़ से पहुंचे किसान गुरमीत सिंह और गुरदेव सिंह ने कहा कि जागरूकता शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे और किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही उनकी समस्याओं को भी गंभीरता से सुना गया। किसानों ने ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की, ताकि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और कृषि-पशुपालन से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी समय पर मिल सके।
प्रशासन की ओर से गांवों में पहुंचकर किसानों से संवाद करने की पहल को किसानों ने उपयोगी बताया है, लेकिन उनका कहना है कि केवल योजनाओं की जानकारी देने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। दूध के दाम, पशु आहार की बढ़ती कीमत और ऋण उपलब्धता जैसे मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि शिविरों में दर्ज शिकायतों पर संबंधित विभाग कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं।