summer express , चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहन देने के लिए एक साथ तीन नई योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं के तहत किराये के भवन में संचालित एमएसएमई को लीज रेंट की 25 प्रतिशत राशि की प्रतिपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा सेवा क्षेत्र की नई एमएसएमई इकाइयों को तीन साल तक दो प्रतिशत ब्याज में राहत मिलेगी, जबकि ई-कार्गो वाहन खरीदने पर सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जाएगी।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने तीनों नीतियों को अधिसूचित कर दिया है। इनमें एमएसएमई के लिए लीज रेंट प्रतिपूर्ति, सेवा क्षेत्र की नई इकाइयों के लिए ब्याज में राहत और ई-कार्गो वाहनों की खरीद पर वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने उद्यमियों से मिले फीडबैक के आधार पर इन योजनाओं को मंजूरी दी थी।
नई नीति के तहत विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की एमएसएमई इकाइयों को लीज पर लिए गए परिसर के किराये की 25 प्रतिशत राशि वापस मिलेगी। यह सुविधा अधिकतम तीन वर्ष तक दी जाएगी। इसके लिए वही एमएसएमई पात्र होंगी, जिन्होंने पिछले साल एक अप्रैल के बाद व्यावसायिक उत्पादन या संचालन शुरू किया है।
योजना का लाभ लेने के लिए इकाई के पास कम से कम तीन वर्ष की अवधि वाली पंजीकृत वाणिज्यिक लीज डीड होना अनिवार्य है। किराये पर लिया गया परिसर किसी असंबंधित पक्ष का होना चाहिए। इसके साथ ही एमएसएमई के पास वैध उद्यम पंजीकरण प्रमाणपत्र भी होना जरूरी है।
सेवा क्षेत्र की नई एमएसएमई इकाइयों को भी सरकार ने राहत दी है। ऐसी इकाइयों के टर्म लोन या वर्किंग कैपिटल में से किसी एक ऋण पर तीन वर्ष तक दो प्रतिशत ब्याज की छूट मिलेगी। इस योजना के दायरे में स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यटन, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण, आईटी, बल्क कूरियर सेवाएं, अनुसंधान एवं विकास केंद्र, टेस्टिंग लैब, इंजीनियरिंग एवं डिजाइन सेवाएं, उपकरण मरम्मत, पर्यावरण सेवाएं और एंटरटेनमेंट पार्क जैसी गतिविधियां शामिल हैं। ट्रेडिंग यूनिट को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
तीसरी योजना के तहत एमएसएमई को नए इलेक्ट्रिक कार्गो ट्रक या कमर्शियल कार्गो ईवी खरीदने पर एक्स-शोरूम कीमत की 15 प्रतिशत राशि प्रतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। एक एमएसएमई को योजना की अवधि के दौरान अधिकतम एक वाहन पर ही यह लाभ मिलेगा।
ई-कार्गो वाहन की लोड वहन क्षमता 700 किलोग्राम से 10 हजार किलोग्राम तक निर्धारित की गई है। योजना के तहत शुरुआती 250 पात्र एमएसएमई को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर सहायता दी जाएगी। यह लाभ बजट उपलब्ध रहने तक भी जारी रहेगा। एक अप्रैल 2026 या इसके बाद खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहन ही योजना के लिए पात्र होंगे।
वाहन हरियाणा की अधिकृत डीलरशिप से खरीदा गया और हरियाणा में पंजीकृत होना चाहिए। वाहन फर्म के नाम पर होना अनिवार्य है। जिन एमएसएमई का मुख्य कारोबार लॉजिस्टिक्स या ट्रांसपोर्टेशन है, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सेकेंड हैंड ई-वाहन भी योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं।