Summer express, मोनिका रावत , चंडीगढ़। हरियाणा की लाइसेंस प्राप्त रिहायशी कॉलोनियों में अब नर्सिंग होम खोलने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने मौजूदा नीति को संशोधित करते हुए प्रदेशभर की लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों के रिहायशी प्लॉटों पर नर्सिंग होम स्थापित करने की अनुमति दे दी है। हालांकि यह सुविधा सभी के लिए खुली नहीं होगी। इसके लिए प्लॉट का निर्धारित आकार, डॉक्टर की योग्यता और कई प्लानिंग शर्तें पूरी करनी होंगी।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की ओर से जारी नई नीति के मुताबिक नर्सिंग होम की अनुमति एलोपैथिक या आयुष के योग्य डॉक्टर को ही मिलेगी। डॉक्टर के नाम रिहायशी प्लॉट होना चाहिए अथवा वह कम से कम 10 साल की लीज पर प्लॉट लेकर नर्सिंग होम संचालित कर सकता है। डॉक्टर का संबंधित मेडिकल अथवा आयुष काउंसिल में वैध पंजीकरण और स्थानीय इंडियन मेडिकल एसोसिएशन शाखा में पंजीकरण भी जरूरी होगा।
प्लॉट छोटा हुआ तो नहीं मिलेगी मंजूरी
सरकार ने इलाके के हिसाब से प्लॉट का न्यूनतम आकार भी तय कर दिया है। हाइपर और हाई पोटेंशियल जोन में कम से कम 350 वर्ग गज तथा मीडियम और लो पोटेंशियल जोन में 250 वर्ग गज का प्लॉट जरूरी होगा। हाइपर और हाई जोन में नर्सिंग होम के लिए साइट की पहुंच सर्विस रोड से होनी चाहिए। इसके अलावा जिस लाइसेंस प्राप्त प्लॉटेड कॉलोनी में नर्सिंग होम की अनुमति दी जाएगी, वहां सभी आंतरिक सेवाएं बिछी होना और कंप्लीशन अथवा पार्ट-कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी होना जरूरी है।
एक सेक्टर में चार से ज्यादा नर्सिंग होम नहीं
सरकार ने रिहायशी इलाकों में नर्सिंग होम की संख्या को भी सीमित रखा है। सेक्टर की डिवाइडिंग रोड से लगती सर्विस रोड पर एक ही साइट की अनुमति होगी और एक सेक्टर में अधिकतम चार साइट मंजूर की जा सकेंगी। इससे रिहायशी सेक्टरों में नर्सिंग होम की अनियंत्रित संख्या बढ़ने पर रोक लगाने की कोशिश की गई है।
एंबुलेंस भी सड़क पर नहीं खड़ी होगी
नर्सिंग होम के लिए पार्किंग को लेकर भी नियम सख्त रखे गए हैं। हरियाणा बिल्डिंग कोड के अनुसार पार्किंग देनी होगी और स्टिल्ट पार्किंग अनिवार्य होगी। नर्सिंग होम आने वाले वाहनों के साथ एंबुलेंस की पार्किंग भी पूरी तरह प्लॉट की सीमा के भीतर करनी होगी। इसके लिए सामने की बाउंड्री वॉल बनाने की अनुमति नहीं होगी। बेसमेंट में क्लिनिक, एक्स-रे और लैब जैसी सुविधाएं भी निर्धारित नियमों के तहत बनाई जा सकेंगी।
10 हजार रुपये प्रति गज तक शुल्क
नर्सिंग होम के लिए पोटेंशियल जोन के हिसाब से कन्वर्जन चार्ज तय किए गए हैं। हाइपर जोन में 10 हजार रुपये प्रति वर्ग गज, हाई में 8 हजार, मीडियम में 6 हजार और लो जोन में 4 हजार रुपये प्रति वर्ग गज शुल्क लगेगा। खास बात यह है कि इन मामलों में ईडीसी समेत कोई अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा। आवेदन नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निदेशक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को करना होगा।
रिहायशी इलाके में अस्पताल जैसी गतिविधियों पर भी सीमा
सरकार ने साफ किया है कि नर्सिंग होम परिसर में डायग्नोस्टिक सुविधाओं के अलावा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। इनडोर और आउटडोर मरीजों के लिए फार्मेसी चलाने की छूट रहेगी। नर्सिंग होम का नियमित निरीक्षण स्वास्थ्य विभाग करेगा और अस्पताल के कचरे के निस्तारण के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का पालन करना होगा। साथ ही सीवेज और अन्य अपशिष्ट के निस्तारण तथा सफाई की पर्याप्त व्यवस्था करना अनिवार्य होगा। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नर्सिंग होम से आसपास रहने वाले लोगों को किसी तरह की असुविधा या परेशानी न हो।