समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में बदलाव की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पद से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान ने वड़िंग को संगठन में बदलाव के फैसले की जानकारी दी थी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा सौंपा।
यह घटनाक्रम नए प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट की संगठनात्मक समीक्षा और नेताओं से हुई बातचीत के बाद सामने आया है। पायलट ने प्रदेश के नेताओं और जिला स्तर के पदाधिकारियों से चर्चा के बाद आलाकमान को रिपोर्ट सौंपी थी।
वड़िंग अप्रैल 2022 में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने थे। उनके कार्यकाल में पार्टी को लगातार अंदरूनी मतभेदों का सामना करना पड़ा। इस साल जून-जुलाई में भी संगठन में बदलाव को लेकर चर्चा हुई थी। उस समय वड़िंग को पद पर बरकरार रखते हुए चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई थी। विजय इंदर सिंगला, सुखजिंदर सिंह रंधावा और अन्य नेताओं को भी संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। इसके बावजूद नेतृत्व को लेकर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए।
नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि आलाकमान ने उनके नाम पर सहमति बना ली है और औपचारिक घोषणा जल्द हो सकती है। हालांकि सिंगला ने खुद कहा है कि उन्हें पार्टी की ओर से कोई औपचारिक पत्र नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, वह कार्यकर्ता के रूप में उसे निभाने के लिए तैयार हैं।
सिंगला के अलावा जालंधर कैंट के विधायक परगट सिंह, गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला और राजा सांसी के विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया के नाम भी चर्चा में हैं। कुछ रिपोर्टों में चरणजीत सिंह चन्नी का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल किया गया है। अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान को करना है।
{जातीय और क्षेत्रीय संतुलन: नए अध्यक्ष के चयन में पार्टी के भीतर जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिंगला का नाम इसलिए भी चर्चा में है कि वह मालवा क्षेत्र से आते हैं और पार्टी में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। दूसरी ओर, जाट सिख नेतृत्व के प्रतिनिधित्व को लेकर सुखजिंदर सिंह रंधावा और अन्य नामों पर भी विचार की चर्चा है। ऐसे में अंतिम चयन केवल व्यक्ति के नाम तक सीमित न रहकर संगठन में विभिन्न समूहों के संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।
चन्नी-रंधावा दिल्ली में
वड़िंग के इस्तीफे के बाद चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के दिल्ली पहुंचने की खबरों ने नेतृत्व बदलाव को लेकर चर्चा और तेज कर दी है। दोनों नेताओं की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की संभावना बताई जा रही है। हालांकि चन्नी ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अब नाराजगी दूर करने और मिलकर काम करने पर जोर होना चाहिए। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी नेतृत्व परिवर्तन को लेकर टिप्पणी की है।
चुनाव से पहले संगठन की चुनौती
नए अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश संगठन को एकजुट कर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज करना होगी। पार्टी नेतृत्व की हालिया कवायद का एक उद्देश्य लंबे समय से चल रही गुटबाजी को कम करना और जिला स्तर तक संगठन को सक्रिय करना बताया जा रहा है। वड़िंग के इस्तीफे के बाद कांग्रेस को जल्द नए अध्यक्ष की घोषणा करनी है, ताकि चुनावी तैयारियों में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता खत्म हो सके।