समर न्यूज | मुंबई
महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर रविवार को मुंबई में बड़ा विपक्षी प्रदर्शन हुआ। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का नेतृत्व किया। कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के कई वरिष्ठ नेता भी इसमें शामिल हुए।
रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह भाजपा के “हथियार” के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इसका उद्देश्य मतदाता सूची से अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हटाना है, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि अब तक ऐसे कितने लोगों की पहचान की गई है। ये आरोप उद्धव ठाकरे के राजनीतिक बयान हैं और चुनाव आयोग ने इन्हें स्वीकार नहीं किया है।
राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग की। उन्होंने भविष्य के चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय बैलेट पेपर से कराने की भी वकालत की। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल हैं।
मोर्चा दक्षिण मुंबई में मेट्रो सिनेमा क्षेत्र से शुरू होकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय तक पहुंचा। आयोजकों ने प्रदर्शन में राजनीतिक दलों के झंडे नहीं लाने और केवल तिरंगा लेकर शामिल होने की अपील की थी।
कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा पहले उठाए गए कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों का जिक्र किया।एनसीपी (एसपी) के नेता भी प्रदर्शन में मौजूद रहे।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाना और सभी पात्र भारतीय नागरिकों के नाम सुनिश्चित करना है। आयोग ने हाल में आंतरिक मतभेदों से जुड़ी खबरों पर कहा था कि निर्णय सामूहिक रूप से लिए गए हैं और अलग-अलग विचार निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
महाराष्ट्र में एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है और इसके खिलाफ कानूनी चुनौतियां भी सामने आई हैं।