Summer express, अंकुर कपूर, अंबाला। हरियाणा की अनाज मंडियों में धान की आवक लगातार जारी है और खरीद का सीजन अपने चरम पर पहुंच गया है। शुरुआती दौर में गेट पास, फसल के उठान और भुगतान को लेकर परेशानियों का सामना करने वाले किसानों को अब राहत मिल रही है। किसानों का कहना है कि मंडियों में धान का उठान तेज हुआ है और फसल की खरीद के बाद भुगतान भी समय पर उनके बैंक खातों में पहुंच रहा है।
धान का सीजन शुरू होने के दौरान किसानों को कई तरह की दिक्कतें आई थीं। धान की फसल समय से पहले पकने के कारण किसान उसे लेकर मंडियों में पहुंचने लगे थे, लेकिन सरकारी नियमों के चलते शुरुआती दिनों में खरीद शुरू नहीं हो पाई थी। इसके अलावा मंडियों में पहले से गेहूं पड़ा होने के कारण धान रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही थी। पोर्टल में आई समस्या के चलते कई किसानों के गेट पास भी नहीं कट पा रहे थे। इन समस्याओं को लेकर किसानों ने कई बार विरोध भी जताया था।
पोर्टल की समस्या दूर होने के बाद गेट पास बनने शुरू हुए और मंडियों में धान की खरीद ने रफ्तार पकड़ी। हालांकि, शुरुआत में जगह की कमी के कारण किसानों को परेशानी होती रही, लेकिन अब लगातार उठान होने से मंडियों में जगह उपलब्ध हो रही है। किसानों का कहना है कि फिलहाल गेट पास बनने, फसल के उठान और भुगतान की प्रक्रिया में सुधार आया है। इससे उन्हें राहत मिली है और वे मौजूदा व्यवस्था से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
मंडी सुपरवाइजर सत्येंद्र कांगड़ा ने बताया कि मंडी में अब तक 3 लाख 39 हजार की धान आवक दर्ज की जा चुकी है, जबकि 2 लाख 90 हजार की खरीद हो चुकी है। उन्होंने बताया कि खरीदे गए धान में से 79 प्रतिशत का उठान भी किया जा चुका है। उनके अनुसार, उठान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों के खातों में भुगतान समय पर भेजा जा रहा है।
सत्येंद्र कांगड़ा ने बताया कि मंडी की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और कैबिनेट मंत्री अनिल विज भी दौरा कर चुके हैं। दोनों मंत्रियों ने व्यवस्थाओं को लेकर जरूरी निर्देश दिए थे। इसके अलावा अधिकारी भी समय-समय पर मंडी का निरीक्षण कर रहे हैं और कमियां मिलने पर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि मौसम खराब होने की आशंका को देखते हुए आढ़तियों को तिरपाल सहित जरूरी इंतजाम रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बारिश होने की स्थिति में किसानों की फसल को सुरक्षित रखा जा सके।