जालंधर | देश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज खुद एक असमंजस में घिरी दिख रही है। जिस पार्टी ने चुनावी मैदान में तेजी से उम्मीदवार उतारे, केंद्रीय मंत्रियों की नियुक्ति में देर नहीं लगाई, उसी पार्टी को अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर फैसला लेने में महीनों का वक्त लग रहा है।
पिछले 13 महीने से पार्टी में नया अध्यक्ष चुनने को लेकर केवल चर्चाएं चल रही हैं — लेकिन कोई ठोस निर्णय अब तक सामने नहीं आया। मौजूदा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का कार्यकाल भी बढ़ाया जा चुका है, लेकिन उनकी जगह कौन लेगा? यह सवाल अब बीजेपी के भीतर और बाहर, दोनों जगहों पर चर्चा का विषय बन चुका है।
नए अध्यक्ष के नाम पर क्यों अटकी बात?
दरअसल, BJP का यह फैसला महज संगठन का नहीं है — इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भी अहम भूमिका है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले की संयुक्त सहमति के बिना नया अध्यक्ष तय नहीं किया जाएगा। माना जा रहा है कि संघ और पार्टी दोनों अपने-अपने पसंदीदा नाम पर अड़े हैं, लेकिन कोई सर्वमान्य चेहरा अब तक सामने नहीं आ पाया।
इन नेताओं के नामों की हो रही चर्चा
बीते महीनों में कई नेताओं के नाम सामने आए — जैसे भूपेंद्र यादव, धरमेंद्र प्रधान, और मनोहर लाल खट्टर। अब ताजा दौर में महिला नेतृत्व की चर्चा भी जोरों पर है। महिला वोट बैंक को साधने के लिहाज से वनती श्रीनिवासन, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और दग्गुबाती पुरंदेश्वरी जैसी महिला नेताओं के नाम पर भी मंथन चल रहा है।
उम्र सीमा बनी बाधा?
संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान के बाद यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि अध्यक्ष पद के लिए किसी ऐसे नेता को तरजीह दी जाएगी, जिसकी उम्र 75 से कम हो। इससे कई वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी भी कमजोर पड़ सकती है।