नई दिल्ली | विदेशी बाजारों में डॉलर के कमजोर पड़ने के बावजूद रुपया बड़ी मजबूती नहीं पकड़ सका। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 17 पैसे मजबूत होकर 86.24 प्रति डॉलर पर पहुंचा, लेकिन यह बढ़त सीमित रही। कारण? भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली।
क्यों नहीं संभल पा रहा रुपया?
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, भारत-अमेरिका FTA को लेकर अनिश्चितता और घरेलू शेयर बाजारों की कमजोर स्थिति रुपए की तेजी को थाम रही है। गुरुवार को रुपया 86.33 पर खुला और थोड़ी बढ़त के साथ 86.24 तक पहुंचा, जबकि बुधवार को यह 86.41 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
डॉलर सूचकांक और क्रूड का हाल
अमेरिकी डॉलर का सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले इसकी स्थिति बताता है, 0.06% गिरकर 97.15 पर आ गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.25% बढ़कर 68.68 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
बाजार की हालत भी बिगड़ी
घरेलू शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखी गई।
- सेंसेक्स: 124.79 अंकों की गिरावट के साथ 82,601.85 पर
- निफ्टी: 15.75 अंकों की गिरावट के साथ 25,204.15 पर बंद
FII कर रहे हैं भारी बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 4,209.11 करोड़ रुपए के शेयर बेचकर बाजार में दबाव और बढ़ा दिया।