नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टेलीफोन पर करीब 35 मिनट बातचीत की। इस दौरान मोदी ने स्पष्ट किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को पाकिस्तान के अनुरोध पर रोका गया था, न कि किसी व्यापारिक सौदे या अमेरिकी मध्यस्थता के कारण। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद को अब “छद्म युद्ध” नहीं, बल्कि “सीधी युद्ध कार्रवाई” के रूप में देखेगा और ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को बताया कि भारत ने 9-10 मई की रात को पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर सटीक जवाबी हमला किया था, जिससे पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को भारी क्षति हुई। मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं मानता और भारत-पाक के बीच कोई अमेरिकी मध्यस्थता नहीं हुई है।
G7 समिट में नहीं हो सकी मुलाकात, फोन पर हुई चर्चा
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि दोनों नेताओं की जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात तय थी, लेकिन ट्रंप की समय से पूर्व रवानगी के कारण बातचीत फोन पर हुई। इस चर्चा में मोदी ने ट्रंप को क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे ट्रंप ने स्वीकार कर लिया।
भारत की ओर से सख्त संदेश
मोदी ने ट्रंप को बताया कि BSF की कार्रवाई में भारत ने हजारों बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा है और पहलगाम हमले के बाद आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का फैसला किया गया था। पीएम ने साफ किया कि भारत की रणनीति नपी-तुली है और उसका उद्देश्य तनाव बढ़ाना नहीं बल्कि आतंकवाद पर करारा प्रहार करना है।
ट्रंप ने जताया समर्थन
विदेश सचिव के अनुसार, ट्रंप ने भारत की स्थिति को समझा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का पूरा समर्थन करने की बात कही। दोनों नेताओं ने इजराइल-ईरान संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा की और शांति बहाली के प्रयासों को प्राथमिकता देने की बात कही।