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आयकर विधेयक में हो सकता है अहम बदलाव, सिर्फ पूंजीगत लाभ कमाने वाली एलएलपी को मिल सकती है राहत

नई दिल्ली | केंद्र सरकार आयकर विधेयक, 2025 में उस विवादास्पद प्रावधान में संशोधन पर विचार कर रही है, जिसके तहत गैर-कॉरपोरेट करदाताओं के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर (AMT) का दायरा बढ़ा दिया गया था। इस श्रेणी में पार्टनरशिप फर्म और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) जैसी इकाइयां आती हैं, जो अक्सर केवल दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) कमाती हैं।

बिल में अध्याय 6-ए के तहत मिलने वाली टैक्स कटौतियों के संदर्भ को हटा दिया गया था, जिससे यह आशंका पैदा हुई कि भले ही कोई फर्म कर लाभ का दावा न करे, फिर भी उसे 18.5% की दर से AMT देना पड़ सकता है। यह बदलाव विशेष रूप से उन एलएलपी के लिए नुकसानदायक होता जो केवल LTCG पर टैक्स देती हैं और वर्तमान में 12.5% की रियायती दर के अंतर्गत आती हैं।

सरकार दे सकती है स्पष्टीकरण

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा, “मूल प्रावधान को पुनः बहाल किया जाएगा। AMT केवल उन करदाताओं पर लागू होगा जो आयकर अधिनियम के तहत विशेष कटौतियों का दावा करते हैं, न कि केवल पूंजीगत लाभ अर्जित करने वालों पर।” बताया गया है कि बिल की समीक्षा के दौरान यह स्पष्टता जोड़ी जाएगी।

क्यों बढ़ी थी चिंता?

AMT का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उच्च आय वाले करदाता छूटों का दुरुपयोग करके टैक्स से पूरी तरह बच न सकें। लेकिन संशोधित विधेयक की भाषा के कारण यह संकेत मिला कि सिर्फ पूंजीगत लाभ अर्जित करने वाली एलएलपी भी 18.5% टैक्स देने के दायरे में आ जाएंगी, जिससे उनके कर भार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती थी।

विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों की राय

ध्रुव एडवाइजर्स के पार्टनर पुनीत शाह ने कहा, “मौजूदा मसौदा विधेयक उन एलएलपी के लिए नुकसानदायक है जो सिर्फ LTCG अर्जित करती हैं। यह एक विसंगति है, जिसे दूर किया जाना चाहिए।” उद्योग संगठनों ने यह मुद्दा संसदीय प्रवर समिति के समक्ष भी उठाया है, जो फिलहाल बिल की समीक्षा कर रही है।

एलएलपी का बढ़ता उपयोग

कंपनी मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल 2025 तक देश में सक्रिय एलएलपी की संख्या 3.95 लाख तक पहुंच चुकी थी, जो पिछले साल की तुलना में 19.5% अधिक है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कई फैमिली ऑफिस दीर्घकालिक निवेश के लिए एलएलपी स्ट्रक्चर का उपयोग करते हैं ताकि 12.5% की रियायती दर का लाभ मिल सके।

वर्तमान नियम क्या कहते हैं?

आयकर अधिनियम, 1961 के तहत AMT तभी लागू होता है जब कोई एलएलपी या पार्टनरशिप फर्म अध्याय 6-ए के तहत किसी विशेष छूट का दावा करती है — जैसे कि दान (80G), इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से आय (80IA-IE), नए कर्मचारियों की नियुक्ति (80JJAA) या रीसाइक्लिंग कारोबार (80JJA)। यदि इन छूटों के बाद कर देनदारी 18.5% से कम होती है, तभी AMT लागू होता है।

Karuna

infosummerexpress@gmail.com

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