जालंधर |भ्रष्टाचार के आरोपों में विजिलेंस द्वारा गिरफ्तार किए गए विधायक रमन अरोड़ा की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जहां एक ओर करोड़ों रुपये के घोटाले और बेनामी संपत्तियों के आरोप में वे हिरासत में हैं, वहीं अब उन पर प्राइम लोकेशन की 35 मरले जमीन पर फर्जीवाड़े से कब्जा करने का गंभीर आरोप भी सामने आया है।
फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से की गई रजिस्ट्री की जांच शुरू
सुल्तानपुर लोधी निवासी शिकायतकर्ता वासु पाठक ने डीजीपी गौरव यादव को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि विधायक रमन अरोड़ा ने अपने समधी राजू मदान, बेटे राजन अरोड़ा और एक तहसीलदार के साथ मिलकर जालंधर के मोता सिंह नगर में करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा किया है। आरोप है कि एक फर्जी मुख्तियारनामा तैयार करवाकर इस संपत्ति की रजिस्ट्री भी करवा ली गई।
डीजीपी कार्यालय ने इस शिकायत को जांच के लिए जालंधर कमिश्नरेट के एडीसीपी (हेडक्वार्टर) सुखविंदर सिंह को मार्क कर दिया है। हालांकि, जब इस बारे में एडीसीपी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने ऐसी किसी शिकायत की जानकारी होने से इनकार कर दिया, जिससे पूरे मामले पर और सवाल खड़े हो रहे हैं।
नंबरदार की भूमिका भी संदिग्ध, जांच की मांग
शिकायत में यह भी बताया गया है कि इस कथित फर्जी दस्तावेज़ पर गवाही देने वाले नंबरदार की भूमिका भी संदिग्ध है। उक्त नंबरदार पर पहले भी कई बार दस्तावेजों में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं और उसे कई दागी अधिकारियों का करीबी बताया जाता है। पुलिस इस पहलू की भी जांच करेगी।
शिकायतकर्ता का आरोप: जान को है खतरा
वासु पाठक का आरोप है कि विधायक अरोड़ा की पुलिस अफसरों से मिलीभगत है और उन्होंने अपने प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हुए पूर्व में भी कई मामलों को दबाया है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें और उनके परिवार को भी जान का खतरा है।
अब भी फरार हैं समधी और बेटा, गिरफ्तारी पर उठे सवाल
विधायक अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद उनके करीबी महेश मखीजा उर्फ गग्गू को गिरफ्तार किया गया, लेकिन समधी राजू मदान और बेटा राजन अरोड़ा अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। दोनों ने कोर्ट में जमानत याचिकाएं भी दाखिल कर दी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या विजिलेंस इन आरोपियों को जानबूझकर राहत दे रही है?