नई दिल्ली/पिथौरागढ़। कोविड-19 महामारी के चलते पिछले पांच वर्षों से बंद पड़ी कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल एक बार फिर शुरू होने जा रही है। विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि यह बहुप्रतीक्षित धार्मिक यात्रा 30 जून 2025 से शुरू होकर अगस्त तक चलेगी। हर साल की तरह इस बार भी यात्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख दर्रे के रास्ते संचालित की जाएगी।
आध्यात्मिक महत्व से भरपूर यात्रा
कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थल माना जाता है। हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध, जैन और तिब्बती परंपराओं में भी इसे अत्यंत पवित्र स्थान माना गया है। जैन मत में इसे प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव से जोड़ा जाता है, जबकि तिब्बती परंपरा में इसे “स्वास्तिक पर्वत” के रूप में पूजा जाता है। मानसरोवर झील, जहां श्रद्धालु स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं, यात्रा का प्रमुख आकर्षण है।
प्राचीन परंपरा, नया रास्ता
विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित हालिया बैठक में यात्रा संचालन की जिम्मेदारी इस बार भी कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) को सौंपी गई है। यात्रा की शुरुआत दिल्ली से होगी और यात्री टनकपुर व चंपावत होते हुए लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर पहुंचेंगे। यह मार्ग पहले काठगोदाम और अल्मोड़ा से होकर जाता था, लेकिन इस बार रूट में बदलाव किया गया है।
भारत ही नहीं, दुनियाभर से श्रद्धालु होंगे शामिल
कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक गहन आत्मिक अनुभव है। हर साल दुनियाभर से सैकड़ों श्रद्धालु हिमालय की कठिन राहों को पार कर इस पवित्र स्थल तक पहुंचते हैं। यह यात्रा न केवल आस्था, बल्कि साहस, आत्मसंयम और प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनुभव कराती है।