अहमदाबाद | 12 जून को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हुए एयर इंडिया विमान हादसे ने देशभर को झकझोर दिया। हादसे में 241 लोगों की जान चली गई, जिनमें 12 क्रू मेंबर भी शामिल थे। इस त्रासदी ने एयर इंडिया की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन प्रक्रियाओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस अभूतपूर्व संकट के बीच टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने एयर इंडिया की दैनिक गतिविधियों की कमान अपने हाथों में ले ली है। अब वे सुरक्षा समीक्षा, तकनीकी निरीक्षण, सरकारी समन्वय और कर्मचारियों से जुड़े निर्णयों की निगरानी व्यक्तिगत रूप से कर रहे हैं।
परंपरा के अनुरूप सामने आया नेतृत्व
टाटा ग्रुप में यह कोई नया उदाहरण नहीं है। जब भी समूह किसी बड़े संकट में होता है, चेयरमैन व्यक्तिगत रूप से मोर्चा संभालते रहे हैं:
- 1989 में टाटा स्टील में आग लगी थी, तब जे.आर.डी. टाटा ने हालात संभाले।
- 26/11 मुंबई हमलों के समय रतन टाटा ने ताज होटल के प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभाई।
- TCS सहित अन्य कंपनियों के संकटों में एन. चंद्रशेखरन ने निर्णायक नेतृत्व दिखाया।
सीईओ कैंपबेल विल्सन के साथ मिलकर कर रहे काम
रिपोर्ट्स के अनुसार, एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन अब सीधे चेयरमैन चंद्रशेखरन के साथ मिलकर रणनीतिक निर्णयों और नियामक मुद्दों पर काम कर रहे हैं। समूह का मानना है कि मौजूदा हालात में तेज, सटीक और भरोसेमंद नेतृत्व की आवश्यकता है—जिसके लिए चेयरमैन का दखल जरूरी है।
ब्रांड पर संकट, भरोसे की बहाली प्राथमिकता
कंपनी के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों का भरोसा फिर से जीतना है। अधिकारियों के मुताबिक, एयर इंडिया की ब्रांड साख को बहाल करना इस समय सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुआवजा और सुरक्षा पुनरावलोकन
एयर इंडिया ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक यात्री के परिजनों को ₹1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। साथ ही, सुरक्षा प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा और पुनर्गठन की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।