शिक्षा की राह हुई आसान: ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ ने बदली हजारों बच्चों की ज़िंदगी

Chandrika
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Summer Express - शिक्षा की राह हुई आसान: ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ ने बदली हजारों बच्चों की ज़िंदगी

Hamirpur, 25 June

इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना हमीरपुर जिले में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित बच्चों के लिए शिक्षा की नई उम्मीद बनकर उभरी है। बीते दो वर्षों में इस योजना ने 1600 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके भविष्य को संवारने का कार्य किया है।

सरकार द्वारा पहले जहां ₹500 प्रतिमाह की सहायता दी जाती थी, वहीं अब इस राशि को बढ़ाकर ₹1000 कर दिया गया है, जिससे बच्चों की शैक्षणिक ज़रूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा रहा है।

दो वर्षों में खर्च हुए ₹44 लाख, लाभान्वित हुए सैकड़ों बच्चे

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में जिले के 1094 बच्चों को इस योजना का लाभ मिला था, जबकि 2025 में अब तक 559 बच्चे इस योजना से लाभांवित हो चुके हैं। योजना पर अब तक ₹44 लाख से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है, और हमीरपुर जिले के लिए कुल ₹2 करोड़ से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है।

अनाथ और अर्ध-अनाथ बच्चों को प्राथमिकता

यह योजना मुख्यतः उन बच्चों के लिए चलाई जा रही है जो सेमी-ऑर्फन हैं—जिनके माता-पिता में से एक नहीं रहे या एकल अभिभावक द्वारा उनका पालन-पोषण किया जा रहा है। पूर्णतः अनाथ बच्चों को भी इस योजना में सम्मिलित किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी बच्चा सिर्फ आर्थिक कठिनाई के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।

बेटियों के लिए बनी संबल की योजना

इस योजना ने विशेष रूप से एकल माता-पिता, खासकर माताओं के लिए राहत का संदेश दिया है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर निश्चिंत हो सकी हैं और बेटियों की पढ़ाई भी बेरोकटोक जारी रह पा रही है।

योजना की पारदर्शिता और पहुंच पर ज़ोर

जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिल कुमार ने जानकारी दी कि पात्र बच्चों के बैंक खातों में सीधे ₹1000 प्रतिमाह की राशि जमा की जाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजना का लाभ उन्हीं बच्चों को मिल रहा है जो निर्धारित मानदंडों पर खरे उतरते हैं।

सरकार की संवेदनशील पहल, बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव

इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना न सिर्फ एक आर्थिक सहायता कार्यक्रम है, बल्कि यह सामाजिक समानता और शिक्षा के अधिकार की दिशा में प्रदेश सरकार की एक सराहनीय पहल है। यह योजना आने वाले वर्षों में और भी अधिक बच्चों के जीवन को संवारने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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