नई दिल्ली | गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। एक सरकारी विशेषज्ञ पैनल ने करीब 200 महंगी और जीवनरक्षक दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में बड़ी राहत देने की सिफारिश की है। इन दवाओं में कैंसर, एचआईवी, अंग प्रतिरोपण, गहन चिकित्सा (क्रिटिकल केयर) और दुर्लभ बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं |
कैंसर की महंगी दवाएं भी सूची में
पैनल ने कीट्रूडा (Pembrolizumab), टैग्रिसो (Osimertinib) और एन्हर्टु (Trastuzumab Deruxtecan) जैसी कैंसर की दवाओं को पूरी तरह से कस्टम ड्यूटी से छूट देने की सिफारिश की है। इन दवाओं की कीमत एक डोज के लिए लाखों रुपये तक होती है, जिससे सामान्य मरीजों के लिए इन्हें खरीद पाना मुश्किल हो जाता है।
अन्य बीमारियों के इलाज में राहत
- सिकल सेल एनीमिया, ब्लड क्लॉटिंग, और अन्य जटिल बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं जैसे हाइड्रॉक्सीयूरिया और Enoxaparin भी इस सूची में हैं।
- साथ ही ट्रांसप्लांट और एडवांस डायग्नोस्टिक्स किट्स पर भी कस्टम ड्यूटी कम करने का प्रस्ताव है।
दो श्रेणियों में दी गई सिफारिश
- पूर्ण शुल्क माफी: 69 दवाएं
- 5% शुल्क वाली श्रेणी: 74 दवाएं
इसके अलावा, 56 ऐसी दवाएं भी शामिल हैं जो दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के इलाज में इस्तेमाल होती हैं, उन्हें भी ड्यूटी छूट में शामिल करने का प्रस्ताव है।
करोड़ों में बिकने वाली दवाएं भी सूची में
दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में शुमार Zolgensma (जिसकी एक डोज करीब ₹17 करोड़ की है), Spinraza और Evrysdi जैसी दवाएं भी इस राहत प्रस्ताव का हिस्सा हैं। इन दवाओं से पीड़ित परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है, जिसे कम करने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।
स्थायी समिति के गठन का सुझाव
पैनल ने सुझाव दिया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन एक स्थायी इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी गठित की जाए, जो समय-समय पर आवश्यक दवाओं की समीक्षा कर कस्टम ड्यूटी में छूट को लेकर निर्णय ले सके। इससे मरीजों को दीर्घकालिक राहत मिलने की उम्मीद है।