Shimla, Sanju
हिमाचल प्रदेश के तीन प्रमुख जिलों—शिमला, कांगड़ा और कुल्लू—के लिए अब शहरी विकास को एक नई दिशा देने की तैयारी है। इन जिलों के लिए क्षेत्रीय विकास प्लान तैयार किया जाएगा, जिसके तहत टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (TCP) निर्माण गतिविधियों के लिए समग्र योजना तैयार करेगा। इसके लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) दिल्ली के साथ विभाग जल्द एमओयू साइन करेगा।
बुधवार को सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्मानी ने अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पहले चरण में शिमला, कुल्लू और कांगड़ा जिलों को शामिल किया जाएगा और इन क्षेत्रों में व्यावसायिक परिसर, ग्रीन ज़ोन और निर्माण योग्य क्षेत्रों को लेकर एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा।
टीसीपी और एसपीए दिल्ली के बीच होगा एमओयू
मंत्री धर्मानी ने कहा कि SPA दिल्ली, जो कि केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी है, उसकी विशेषज्ञता का लाभ लेते हुए यह योजना तैयार की जाएगी। इससे यह तय होगा कि किन क्षेत्रों में विकास किया जाए और किन क्षेत्रों में निर्माण पर रोक हो।उन्होंने यह भी बताया कि सोलन और लाहौल-स्पीति जिलों के लिए पहले ही राज्य स्तर पर क्षेत्रीय योजनाएं बनाई जा चुकी हैं। भविष्य में पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए एकीकृत विकास योजना तैयार करने की योजना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्य को लेकर नई व्यवस्था
ग्रामीण क्षेत्रों में नदी-नालों के किनारे होने वाले निर्माण कार्य को लेकर भी मंत्री ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हिमाचल हाईकोर्ट ने आपदा के दौरान हुए नुकसान को देखते हुए नियम बनाने और उन्हें लागू करने के निर्देश दिए थे। लेकिन TCP विभाग के पास आवश्यक मैनपावर की कमी के चलते इन निर्देशों को लागू करने में दिक्कत आई है।
अब कोर्ट के आदेशानुसार, पंचायती राज संस्थाओं को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिसमें TCP तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। जल्दी ही इसके लिए निर्माण संबंधी रोडमैप तैयार किया जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी निर्माण नियंत्रित और सुरक्षित हो सके।
आपदा से हुए नुकसान की भरपाई में जुटा प्रशासन
राजेश धर्मानी ने यह भी बताया कि हालिया मानसून आपदा में खासकर मंडी जिला बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं और सभी सरकारी विभाग लोगों की सहायता में जुटे हैं।
सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन नुकसान की गंभीरता को देखते हुए जीवन को सामान्य करने में समय लगेगा। सिराज जैसे क्षेत्रों में भारी मात्रा में लकड़ियां और मलबा नालों में फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने के निर्देश दिए गए हैं।